आर्जव धर्म का संदेश लेकर मनाया दशलक्षण पर्व का तीसरा दिन,

जिनालयों में हुआ जिनाभिषेक, बच्चों ने एक मिनट प्रतियोगिता में लिया उत्साह से भाग।
अवागढ़/एटा। पर्वाधिराज दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को नगर के सभी जिनालयों में जैन श्रावकों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ पूजा-अर्चना की। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में भगवान का जिनाभिषेक किया गया। प्रथम अभिषेक स्वदेश जैन और अनमोल जैन ने किया। मुख्य कलशों का अभिषेक तरुण जैन, शैलेश जैन और अशोक जैन ने किया। शांतिधारा विजय लता जैन और अंकित जैन ने की।
पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा-अर्चना की गई। पंडित विकास जैन शास्त्री और तरुण भैया जयपुर ने आर्जव धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि छल-कपट और मायाचार का त्याग कर मन में सरल भाव रखना ही आर्जव धर्म है। आर्जव आत्मा का स्वभाव है और मन, वचन तथा कर्म में सरलता रखना इसका मूल संदेश है।
दोपहर में श्री तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया। शाम को श्री भक्तामर पाठ के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें एक मिनट प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। बच्चों के उत्साह से कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धा के साथ उल्लास का माहौल रहा।
इस दौरान भगवान पुष्पदंत नाथ के भव्य निर्वाण लाडू महोत्सव की तैयारियां भी की गईं। आयोजन में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में बासू जैन, दीपक जैन, मुकेश जैन, पवन जैन, शगुन जैन, पारस जैन, नरेश जैन, अंकुश जैन, आशुतोष जैन, अंकित जैन, परमिल जैन, राकेश जैन, धनदेव जैन आदि मौजूद रहे।




