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लखनऊ नगर निगम: लेखा विभाग में ‘बंटी-बबली’ की Corruption कहानी, सीएम की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल

Bunty-Babli Corruption Saga in Lucknow Municipal Corporation's Accounts Department

लखनऊ नगर निगम का बंटी-बबली शो: लेखा विभाग के “हीरो” और “हीरोइन” की कहानी

लखनऊ नगर निगम का लेखा विभाग इन दिनों एक दिलचस्प ‘बंटी-बबली’ कहानी का गढ़ बन गया है। यहां किशन कुमार और रीना, जो लगभग 11 वर्षों से लेखा विभाग में अडिग हैं, Corruption और खेल-तमाशे का पर्याय बन चुके हैं। इन्हें ‘लेखा विभाग का सुपरहीरो जोड़ी’ कहना गलत नहीं होगा। और इस कहानी के असली निर्देशक हैं पूर्व के लेखा अधिकारी और वर्तमान लेखा अधिकारी नंदराम कुरील, जिनके बिना यह शो अधूरा है।

जब नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने इनका ट्रांसफर किया, तो कुरील साहब ने अपने ‘प्रिय’ कर्मचारियों को वापस बुलाकर यह साबित कर दिया कि बंटी और बबली के बिना यह शो नहीं चल सकता। स्वास्थ्य और अभियंत्रण विभाग की फाइलें सुलझाने में माहिर बंटी अधिष्ठान विभाग में पहुंचते ही “काम नहीं आता” का राग अलापने लगे। आखिर मलाई चाटने के लिए लेखा विभाग की फाइलें जो जरूरी थीं!

अब इस शो का असली क्लाइमेक्स देखिए—दोनों बाबुओं का कागजों में ही वेतन ट्रांसफर होता रहा है, जबकि हकीकत में सीटें वही रहीं। लेखा विभाग में इनकी काबिजगी का यह आलम है कि फाइलों के इर्द-गिर्द ऐसा ताना-बाना बुना गया है कि सबकुछ ‘सम्बंधिकरण’ के नाम पर चलता है। जैसे पूरा विभाग इनकी निजी संपत्ति हो।

महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी एक बैठक में इस जोड़ी की लंबी टिकाऊ पारी पर सवाल उठाए। पर क्या फर्क पड़ता है? किशन कुमार की शिकायतें पहले भी हुईं, लेकिन मैनेज करने की कला में माहिर साहब ने हर बार मामले को रफा-दफा कर दिया।

मजेदार बात यह है कि लेखा विभाग में केवल ‘भ्रष्ट’ कर्मचारियों की ही भर्ती होती दिखती है। ईमानदार कर्मचारियों को या तो काम से बाहर कर दिया जाता है या फिर उनके खिलाफ लिखित शिकायत कर दी जाती है।

लखनऊ की प्यासी कॉलोनियाँ: जलकल विभाग के जल-चमत्कार का इंतजार

और सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति और नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह की ईमानदारी के बावजूद ये दोनों कर्मचारी कैसे हर बार खुद को बचा ले जाते हैं। यह न सिर्फ नगर निगम प्रशासन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सिस्टम के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।

अब सवाल यह है कि नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह क्यों चुप हैं? शायद उन्हें कुरील साहब की “सही मंशा” का पूरा भरोसा है। पर जनता चाहती है कि किशन कुमार की आय से अधिक संपत्ति और ‘ड्राइवर वाली गाड़ियों’ की जांच हो।

सोचने वाली बात है कि ऐसा हो सकता है कि दो कर्मचारियों के बिना पूरा विभाग ही ठप हो जाए? लेकिन लेखा अधिकारी नंदराम कुरील के हिसाब से “बंटी और बबली के बिना लेखा विभाग का काम ही नहीं चल सकता।” तो क्या विभाग के बाकी कर्मचारी सिर्फ दीवारों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं? या फिर यह जोड़ी अपने खास हुनर से पूरा विभाग अपने इशारों पर नचा रही है?

कहानी तो बहुत लंबी है, पर फिलहाल इतना कह सकते हैं कि लखनऊ नगर निगम का लेखा विभाग एक भ्रष्टाचार का सिनेमाघर बन गया है, और बंटी-बबली इसके स्टार कलाकार।

मनीष मिश्रा

मनीष मिश्रा राज्य संवाददाता, सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल मनीष मिश्रा पिछले 5 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।

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