Dev Deepawali 2024: लखनऊ के मनकामेश्वर घाट पर दिव्य आयोजन
Dev Deepawali 2024: A Grand Celebration at Mankameshwar Ghat, Lucknow
वैश्य नटवर गोयल ने मनकामेश्वर घाट लखनऊ पर मनाई देव दीपावली: एक दिव्य और भव्य आयोजन
लखनऊ, 16 नवंबर 2024 – कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर देशभर में Dev Deepawali 2024 का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी, संगम नगरी प्रयागराज, सरयू तट पर बसी अयोध्या, और लक्ष्मण पुरी यानी लखनऊ में भी यह पर्व भव्यता के साथ मनाया गया। लखनऊ के मनकामेश्वर घाट पर आदि गंगा गोमती के किनारे दीपों की अद्भुत रोशनी से सजी देव दीपावली ने एक दिव्य और अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया।
वैश्य नटवर गोयल ने किया दीप प्रज्वलन
लघु उद्योग निगम के उपाध्यक्ष वैश्य नटवर गोयल ने मनकामेश्वर घाट पर आदि गंगा गोमती की आरती की और दीप जलाकर इस आयोजन में भाग लिया। इस अवसर पर मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्या गिरी जी ने वैश्य नटवर गोयल को अंग वस्त्र और मां गोमती की तस्वीर देकर सम्मानित किया।
गोयल ने इस अवसर पर अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा, “मैं मनकामेश्वर घाट के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए वचनबद्ध हूं। महंत दिव्या गिरी जी के प्रयासों से यह स्थान और भी भव्य और सुंदर हो गया है।”
लखनऊवासियों की उमड़ी भीड़
मनकामेश्वर घाट पर इस वर्ष देव दीपावली का नजारा अद्भुत था। दीपों की झिलमिलाहट ने ऐसा प्रतीत कराया जैसे आसमान खुद जमीन पर उतर आया हो। लखनऊ शहर और आस-पास के क्षेत्रों से हर धर्म और समुदाय के लोग इस उत्सव में शामिल होने आए।
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महंत दिव्या गिरी के प्रयासों की सराहना
वैश्य नटवर गोयल ने अपने वक्तव्य में महंत दिव्या गिरी जी की सराहना की और कहा, “महंत जी के मार्गदर्शन में मनकामेश्वर घाट का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। यह स्थान अब न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक समागम का भी प्रतीक बन गया है।”
देव दीपावली: एकता और आस्था का प्रतीक
लखनऊ की देव दीपावली न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। दीपों की रोशनी ने न केवल गोमती के तट को रोशन किया, बल्कि हर दिल में आनंद और उमंग का संचार किया।
इस वर्ष मनकामेश्वर घाट की देव दीपावली 2024 ने लखनऊवासियों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। वैश्य नटवर गोयल का योगदान और महंत दिव्या गिरी के प्रयास इसे हर साल और भी भव्य बना रहे हैं। यह आयोजन न केवल लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।




