अब आएगी भोर काव्य संग्रह का लोकार्पण, सरस गोष्ठी में साहित्य की उजली छटा

लखनऊ | साहित्य डेस्क | सूचना इंडिया
आज 4 जनवरी 2026 को सायं तीन बजे, यशःशेष कविवर श्री जगमोहन नाथ कपूर ‘सरस’ की जयंती के शुभ अवसर पर एक गरिमामयी सरस गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन की अध्यक्षता श्री रमाशंकर सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि डॉ. शोभा दीक्षित भावना और विशिष्ट अतिथि श्री कमल किशोर भावुक रहे।

इस अवसर पर सरस जी की नातिन, युवा कवयित्री काव्या खन्ना की सद्यः प्रकाशित काव्य कृति “अब आएगी भोर” का विधिवत लोकार्पण किया गया, जिसे उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं ने खूब सराहा।
अब आएगी भोर काव्य संग्रह का लोकार्पण बना मुख्य आकर्षण

अब आएगी भोर काव्य संग्रह में समकालीन सामाजिक यथार्थ, संवेदना और मानवीय मूल्यों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति देखने को मिली।
काव्या खन्ना की चर्चित पंक्तियाँ—
“बिक रहा ईमान है,
बिक रहा सम्मान है…”
—ने श्रोताओं को गहरे तक प्रभावित किया और सभागार तालियों से गूंज उठा।
सरस गोष्ठी का शुभारंभ वाणी वंदना से
गोष्ठी का शुभारंभ मुकेश मिश्र की वाणी वंदना से हुआ। कार्यक्रम का सधे हुए और प्रभावशाली संचालन श्री नवीन शुक्ल ने किया, जिन्होंने पूरी गोष्ठी को साहित्यिक गरिमा के साथ आगे बढ़ाया।
कवियों की रचनाओं ने बांधा समां
श्री आवारा नवीन ने सजल पाठ किया—
“मनमोहक यह भोर देखिए,
चिड़ियों का बस शोर देखिए।”
श्री अवधेश गुप्त ‘नमन’ की पंक्तियाँ—
“आंख में हो नहीं और क्या चाहिए,
एक आंधी थमी और क्या चाहिए।”
—ने गहरी संवेदना जगाई।
मुकेश मिश्र के भगवान राम पर आधारित गीत व दोहे विशेष रूप से सराहे गए—
“विषधर के घर जन्म ले अगर हुए विषहीन,
फिर डलिया में बैठ कर सुनते रहना बीन।”
ग़ज़लों और नवगीतों की प्रभावी प्रस्तुति
चन्द्र देव दीक्षित की ग़ज़ल—
“जाने कितने नाम मिले हैं,
मुझको बस इल्ज़ाम मिले हैं”
—ने खूब वाहवाही लूटी।
नवीन शुक्ल की ग़ज़ल—
“अमीरी का तुम्हें जलवा दिखाना हो तो मत आना…”
—पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
डॉ. मृदुल शर्मा का नवगीत पाठ
डॉ. मृदुल शर्मा ने नवगीत और दोहों के माध्यम से सामाजिक यथार्थ प्रस्तुत किया—
“धैर्य, शौर्य, कौशल नहीं, राजा की जागीर,
चीख-चीखकर कह रहे, एकलव्य के तीर।”
विशिष्ट और मुख्य अतिथि का काव्य पाठ
विशिष्ट अतिथि श्री कमल किशोर भावुक ने गीत, ग़ज़ल और दोहे प्रस्तुत किए—
“भीषण सर्दी से हुआ जब जीवन बेहाल,
बुना धूप ने तरह का तब किरणों से शाल।”
मुख्य अतिथि डॉ. शोभा दीक्षित भावना ने छंद और गीत पाठ करते हुए कहा—
“जीवन तो यह मधुर स्वप्न का ताना-बाना है,
और नहीं कुछ यह सांसों का आना-जाना है।”
अध्यक्षीय काव्य पाठ से हुआ समापन
गोष्ठी के अध्यक्ष श्री रमाशंकर सिंह ने अध्यक्षीय काव्य पाठ में कहा—
“दृष्टि में प्रिय की नहीं आता अगर,
प्रेम का वरदान कैसे ढूंढता?
हाथ कोई शीश पर होता नहीं,
स्नेह का रसपान कैसे ढूंढता?”
इन्हीं भावपूर्ण पंक्तियों के साथ गोष्ठी का विधिवत समापन हुआ।
अतिथि सत्कार और धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में श्रीमती नीता खन्ना, रुचिर खन्ना और श्रीमती ऊर्जा मेहरोत्रा ने सभी अतिथि कवियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए चाय-नाश्ते की सुंदर व्यवस्था की।
इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस साहित्यिक आयोजन में मीना कपूर, मंजुलिका अशोक, गीता सिंह, डॉ. संदीप सिंह गौर, अशोक ओझा, ओ.पी. श्रीवास्तव, प्रीतम सिंह, मीनाक्षी शर्मा, शिखा सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।




