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Rashtriya Swayamsevak Sangh: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का इतिहास, उद्देश्य और संरचना

Rashtriya Swayamsevak Sangh: History, Objectives, and Structure

आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ): एक विस्तृत जानकारी

आरएसएस क्या है?
आरएसएस, यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, एक भारतीय स्वयंसेवी संगठन है जिसे 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में स्थापित किया था। इसका उद्देश्य भारत में हिंदुत्व की विचारधारा को बढ़ावा देना और समाज में नैतिकता, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता का निर्माण करना है।

आरएसएस का पूरा नाम क्या है?
आरएसएस का पूरा नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है।

आरएसएस का Head ऑफिस कहाँ है?
आरएसएस का मुख्यालय (हेड ऑफिस) नागपुर, महाराष्ट्र में स्थित है। इसे “हेडगेवार भवन” के नाम से भी जाना जाता है।

आरएसएस में सबसे बड़ा पद कौन सा है?
आरएसएस में सबसे बड़ा पद सरसंघचालक का होता है। यह संगठन के प्रमुख का पद है।

आरएसएस की Hierarki क्या है?
आरएसएस की संगठनात्मक संरचना इस प्रकार है:

  1. सरसंघचालक (प्रमुख)
  2. सह-सरसंघचालक
  3. सरकार्यवाह (महासचिव)
  4. सह-सरकार्यवाह
  5. प्रांत प्रचारक
  6. जिला प्रचारक
  7. शाखा प्रमुख

क्या आरएसएस में शामिल लोगों को सैलरी मिलती है?
आरएसएस में काम करने वाले स्वयंसेवकों को सैलरी नहीं मिलती। यह एक स्वयंसेवी संगठन है, और यहां काम करने वाले लोग अपनी सेवाएं निःस्वार्थ रूप से प्रदान करते हैं।

आरएसएस में कौन लोग शामिल हो सकते हैं? और इसकी शर्तें क्या हैं?
आरएसएस में कोई भी भारतीय नागरिक शामिल हो सकता है। इसके लिए प्रमुख शर्तें हैं:

  • भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति समर्पण।
  • संगठन के नियमों का पालन करना।
  • नियमित शाखा में भाग लेना।

आरएसएस के गठन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आरएसएस के गठन का उद्देश्य भारत में हिंदुत्व की रक्षा करना, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना, और देश में राष्ट्रीयता की भावना को बढ़ावा देना है।

आरएसएस पर किसने, कब और क्यों बैन लगाया था?
आरएसएस पर तीन बार बैन लगाया गया:

  1. 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद।
  2. 1975 में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी सरकार ने।
  3. 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद।

आरएसएस को दोबारा बैन मुक्त कब और किनके द्वारा किया गया?

  • 1949 में नेहरू सरकार ने।
  • 1977 में जनता पार्टी सरकार ने।
  • 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए बैन हटाया कि कोई अवैध गतिविधि का सबूत नहीं है।

आरएसएस का BJP से क्या संबंध है?
आरएसएस और बीजेपी का संबंध काफी गहरा है। बीजेपी की स्थापना आरएसएस की विचारधारा पर आधारित है। आरएसएस के कई प्रमुख नेता बीजेपी में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
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क्या आरएसएस की गतिविधियां संदिग्ध हैं?
आरएसएस के आलोचक इसके एजेंडे पर सवाल उठाते हैं, लेकिन संगठन का कहना है कि वह केवल सामाजिक और सांस्कृतिक सुधार के लिए काम करता है।

आरएसएस की अभी तक की उपलब्धियां कौन-कौन सी हैं?

  1. सेवा भारती जैसे सामाजिक सेवा संगठनों की स्थापना।
  2. आपदाओं के दौरान राहत कार्य।
  3. भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देना।
  4. युवाओं में राष्ट्रवादी सोच का विकास।

आरएसएस के प्रमुख का कार्यकाल कितने वर्षों का होता है?
आरएसएस प्रमुख का कार्यकाल निर्धारित नहीं होता है। यह आजीवन भी हो सकता है, या जब तक संगठन को उचित लगे।

आरएसएस के प्रमुख (सरसंघचालक) और उनका कार्यकाल:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक संगठन के शीर्ष पद पर होते हैं। अब तक के सभी सरसंघचालकों और उनके कार्यकाल की सूची इस प्रकार है:

1. डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (1925 – 1940)

  • आरएसएस के संस्थापक।
  • उनका नेतृत्व संगठन की नींव को मजबूत करने में अहम था।

2. माधव सदाशिव गोलवलकर (1940 – 1973)

  • लोकप्रिय रूप से “गुरुजी” के नाम से जाने जाते हैं।
  • संगठन को अखिल भारतीय स्तर पर विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

3. मधुकर दत्तात्रेय देवरस (1973 – 1994)

  • उनके कार्यकाल में संगठन के कई सामाजिक अभियानों की शुरुआत हुई।
  • दलित समुदाय के लिए कार्य करने पर जोर दिया।

4. प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) (1994 – 2000)

  • सरल व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे।
  • उनके समय में आरएसएस का ध्यान सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रहा।

5. के.एस. सुदर्शन (2000 – 2009)

  • संगठन में तकनीकी और आधुनिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया।
  • भारत के सांस्कृतिक उत्थान के लिए काम किया।

6. मोहन भागवत (2009 – वर्तमान)

  • वर्तमान में आरएसएस के सरसंघचालक।
  • उनके नेतृत्व में संगठन ने डिजिटल और वैश्विक स्तर पर अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के सबसे प्रभावशाली संगठनों में से एक है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक सुधार के क्षेत्र में कार्यरत है। हालांकि इसे लेकर कई बार विवाद भी हुए हैं, लेकिन यह संगठन अपनी विचारधारा और कार्यप्रणाली के लिए चर्चित है।

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