लखनऊ की प्यासी कॉलोनियाँ: जलकल विभाग के जल-चमत्कार का इंतजार
Water Crisis in Lucknow: Gomti Nagar & Indira Nagar Residents Face One-Hour Water Supply Only

लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। गोमती नगर और इंदिरा नगर की लगभग चार लाख की प्यासी जनता अब शुक्रवार से जलकल विभाग के अनोखे चमत्कार का अनुभव करेगी। शारदा सहायक नहर का जल-धार प्रवाह तो 12 अक्टूबर से रुका हुआ है, परंतु विभाग के अधिकारी इतने ‘पानीदार‘ हैं कि उन्हें इसका एहसास तक नहीं हुआ। उन्होंने अपनी पानी में धुली हुई योजनाओं में झील को प्यासा छोड़ दिया और अब झील में बस सात इंच पानी बाकी है। यानी सात समुंदर पार का सफर तो नहीं, पर पानी के लिए सात इंच की दूरी ज़रूर तय करनी पड़ेगी।
कटौती का नया फॉर्मूला: एक घंटा जलदान
अब विभाग ने ‘पानी बचाओ‘ का नारा दिया है, पर केवल कागजों पर। विभाग का प्लान है कि दोनों कॉलोनियों में केवल एक घंटे की जलधारा बहाई जाएगी, ताकि जनता को ‘जल संकट‘ के सूक्ष्म दर्शन कराए जा सकें। अब जो सुबह-शाम दो घंटे की जलधारा बह रही थी, उसे भी अब आधे में काट कर एक घंटे का ‘जलदान’ किया जाएगा। शायद यह जलकल विभाग की तरह की ‘पानीदार’ समाजसेवा का उदाहरण है।
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पानी का रास्ता: लखीमपुर से चलो, परंतु गोमती तक न पहुंचो
लखीमपुर से पानी छोड़ा गया, तो लोग खुशी से झूम उठे। सोचा था कि शारदा सहायक नहर तक पानी पहुंचने का समय है दस नवंबर, और कठौता झील तक पहुंचने का वादा था 12 नवंबर तक। लेकिन साहब, यह वादा भी सरकारी निकला। जलकल विभाग का अनुमान है कि 16 नवंबर तक शारदा नहर तक पानी पहुंचेगा और कठौता झील तक 18 नवंबर को।

अधिकारियों की ‘जलसमाधि’ और जनता की परीक्षा
कठौता जलकल के एक्सईएन विकास शर्मा जी ने ‘आपूर्ति के समय में कटौती’ का हल ढूंढ निकाला है। शायद वह इस बात से बेखबर हैं कि जल-धाराओं को अपने समय का ख्याल रखना भी आता है। अब गोमती नगर और इंदिरा नगर के निवासी यह सोचकर संतोष कर सकते हैं कि एक घंटा पानी पाने का सौभाग्य हर दिन मिलेगा – और इसके लिए उन्हें अपने नलों के सामने मंत्र जप करना पड़ेगा।
जलकल विभाग ने जनता के प्यास का समाधान नहीं ढूंढा है, पर यह जरूर तय कर दिया है कि आने वाले दिनों में ‘जल’ का सही अर्थ क्या है, यह समझाने के लिए किसी क्लास की जरूरत नहीं होगी।




