पेयजल लाइन डालकर छोड़ दिया गड्ढों के भरोसे, दिलाराम बारादरी में लोगों का फूटा गुस्सा
लखनऊ। राजधानी के दिलाराम बारादरी क्षेत्र में पेयजल लाइन बिछाने के नाम पर की गई खुदाई अब स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। करीब दो महीने पहले जलकल विभाग के जोन-6 के अंतर्गत ठेकेदार आशीष रस्तोगी द्वारा नई पेयजल लाइन डाली गई थी, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत आज तक नहीं कराई गई। नतीजा यह है कि सड़क जगह-जगह धंस चुकी है, वाहन फंस रहे हैं, राहगीर गिरकर चोटिल हो रहे हैं और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पेयजल लाइन डालने के बाद सड़क को उसकी मूल स्थिति में लाना भी उसी एजेंसी और विभाग की जिम्मेदारी होती है जिसने खुदाई कराई है। लेकिन यहां ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विभाग और ठेकेदार दोनों अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। कोई यह कह रहा है कि सड़क नगर निगम बनाएगा तो कोई जिम्मेदारी जलकल विभाग पर डाल रहा है। इस खींचतान के बीच जनता परेशान है।
🔴 सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
क्षेत्र की बदहाल सड़क की तस्वीरें लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। स्थानीय लोग पार्षद मनीष रस्तोगी को टैग कर सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यह स्थिति बनी रहेगी। कई लोगों ने खुले तौर पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि विकास कार्यों के नाम पर क्षेत्र को गड्ढों में तब्दील कर दिया गया है।
🔴 पार्षद की सुनने को तैयार नहीं अधिकारी!
स्थानीय पार्षद मनीष रस्तोगी का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि जब भी अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र सत्संगी से संपर्क किया जाता है तो अक्सर “I will call you later” का संदेश आ जाता है, लेकिन वह “later” आज तक नहीं आया।
पार्षद का कहना है कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच जवाबदेह होते हैं। अधिकारी और ठेकेदार तो जनता के सामने नहीं आते, लेकिन लोगों के सवालों का सामना उन्हें करना पड़ता है। ऐसे में विभागीय लापरवाही का खामियाजा जनप्रतिनिधियों को भुगतना पड़ रहा है।
🔴 आई विल कॉल यू लेटर’ से आगे नहीं बढ़ रही व्यवस्था
दिलाराम बारादरी की बदहाल सड़कों पर सवाल उठने के बाद सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के राज्य संवाददाता मनीष मिश्रा ने अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र सत्संगी से उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन फोन की घंटियां बजती रहीं और जवाब नहीं मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की सड़कें भले ही दो महीने से उखड़ी पड़ी हों, लेकिन अधिकारियों की व्यस्तता शायद इतनी अधिक है कि जनता, जनप्रतिनिधि और मीडिया—तीनों के सवालों के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया है। अब क्षेत्र में लोग व्यंग्य करते हुए कह रहे हैं कि सड़क कब बनेगी यह तो पता नहीं, लेकिन “आई विल कॉल यू लेटर” जरूर विभाग का अनौपचारिक स्लोगन बन गया है।
🔴 आखिर जिम्मेदार कौन?
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि पेयजल लाइन जलकल विभाग ने डलवाई है तो सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? क्या जनता को यह जानने का अधिकार नहीं है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के बाद सड़कों को बदहाल छोड़ देने की अनुमति किसने दी?
क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि कुछ दिन पहले पार्षद मनीष रस्तोगी और नगर निगम प्रशासन के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद से विकास कार्यों की गति और धीमी पड़ गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं जरूर हैं।
🔴 चुनावी असर की भी आशंका
पार्षद मनीष रस्तोगी ने साफ कहा है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो वह क्षेत्र की जनता के साथ धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि जनता उन्हें ही दोषी ठहरा रही है जबकि काम कराने की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों और कार्यदायी संस्था की है।
उन्होंने कहा कि विकास कार्य केवल उद्घाटन और पाइप डालने तक सीमित नहीं होने चाहिए। जब तक सड़क पूरी तरह दुरुस्त न हो जाए, तब तक किसी भी परियोजना को पूर्ण नहीं माना जाना चाहिए।
🔴 आचार्य नरेंद्र देव वार्ड में सवालों के घेरे में जलकल जोन-6
आचार्य नरेंद्र देव वार्ड के दिलाराम बारादरी क्षेत्र की यह तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र सत्संगी, जूनियर इंजीनियर कुलदीप और कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। जनता का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते मौके पर पहुंचकर स्थिति का समाधान नहीं करते हैं तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है।
🔴 जनता की परेशानी देख पार्षद ने खुद संभाली कमान
स्थानीय लोगों के अनुसार साईं बाबा मंदिर रोड, निवासगंज क्षेत्र में भी सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर कई बार जलकल विभाग और संबंधित अधिकारियों से मरम्मत कराने की मांग की गई थी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पार्षद मनीष रस्तोगी ने स्वयं पहल करते हुए भागवत कथा की कलश यात्रा और धार्मिक आयोजन को देखते हुए अपने स्तर पर मजदूर लगवाकर सड़क को अस्थायी रूप से ठीक कराया। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह कार्य विभाग की जिम्मेदारी थी, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते जनप्रतिनिधि को खुद मैदान में उतरना पड़ा। लोगों का सवाल है कि जब विकास कार्यों की जिम्मेदारी विभागों की है तो फिर पार्षद को अपनी जेब और संसाधनों से सड़कें क्यों दुरुस्त करानी पड़ रही हैं?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेयजल लाइन तो बिछ गई, लेकिन सड़क कब बनेगी? और तब तक जनता की परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा? :::
मनीष मिश्रा राज्य संवाददाता, सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल
मनीष मिश्रा पिछले 7 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।