लखनऊ नगर निगम के जूनियर इंजीनियर्स का तबादला आदेश कुछ ऐसा हो गया है जैसे “आदर्श आदेश – मगर धरातल पर धुंधला प्रभाव”
15 अक्टूबर में नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह की अनुमति से जारी हुआ था तबादला आदेश। आदेश क्या था, मानो एक सख्त चेतावनी थी कि सभी जूनियर इंजीनियर अपनी नई जगहों पर तुरंत कूच करें। कागज पर तो सब कुछ तय हुआ, नये स्थान भी बांटे गए, लेकिन धरातल पर हर कोई अपने पुराने कार्यालय में ही जमे बैठे हैं।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी कई बार आदेश दिए कि “सब अपनी जगह पर जाएं,” लेकिन लगता है ये आदेश उनके कानों तक तो पहुंचे, पर दिमाग तक नहीं। ये जूनियर इंजीनियर्स आदेशों को कुछ इस अंदाज़ में ले रहे हैं जैसे किसी सर्दियों की सुबह की धुंध में खो जाता सूरज। वहीं, जोन में सुधार और पुनर्संयोजन के लिए सहायक अभियंताओं के बदलाव की भी योजना बनाई गई थी, लेकिन ऐसा लगता है कि बदलाव की ये हवा फाइलों में ही उलझ कर रह गई है।
अब देखना ये है कि ये “आधिकारिक स्थानांतरण आदेश” कब वास्तविकता में बदलेगा, या फिर लखनऊ नगर निगम का यह आदेश ‘हमेशा के लिए आदेश’ बन कर नगर निगम की फाइलों में सजीव रहेगा।






