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ईरान-इज़राइल युद्ध: ऑपरेशन ‘Rising Lion’ से मचा हड़कंप | ग़ज़ा से तेहरान तक फैली जंग

ईरान-इज़राइल युद्ध: ग़ज़ा से उठी चिंगारी ने तेहरान तक फैलाई जंग की आग

ग़ज़ा, लेबनान और अब ईरान… इज़राइल ने तीन मोर्चों पर युद्ध छेड़ दिया, अमेरिका ने खुलकर समर्थन दिया

मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध की आग में झुलस चुका है। ग़ज़ा पट्टी से शुरू हुई हिंसा अब ईरान के सैन्य ठिकानों तक पहुंच गई है। इज़राइल ने 13 जून को ईरान पर एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। इससे पहले इज़राइल ग़ज़ा और लेबनान की सीमाओं पर लगातार सैन्य कार्रवाई करता रहा है।

ग़ज़ा से उठी थी लड़ाई की शुरुआत

7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इज़राइल पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया था। इस हमले में 1200 से अधिक इज़राइली नागरिक मारे गए थे, और बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बना लिया गया था। जवाब में इज़राइल ने ग़ज़ा पट्टी पर ज़बरदस्त हवाई हमले किए।

इन हमलों में अब तक 38,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए सैकड़ों स्कूल, अस्पताल और घर तबाह हो गए लाखों लोग बेघर हुए और मानवीय संकट पैदा हो गया
हालांकि युद्ध रुकने के कोई संकेत नहीं मिले थे और हमास लगातार जवाबी हमला करता रहा था।

लेबनान से खुला दूसरा मोर्चा

ग़ज़ा के बाद इज़राइल ने उत्तरी सीमा पर हिज़्बुल्ला से भी मोर्चा ले लिया था।
लेबनान से दागे गए रॉकेटों और हमलों के जवाब में इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में कई हवाई हमले किए।

हिज़्बुल्ला और इज़राइल के बीच झड़पें तेज़ हो गई थीं सीमा क्षेत्रों से हज़ारों लोगों को पलायन करना पड़ा युद्ध की स्थिति दोनों देशों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित करने लगी थी

ईरान से सीधी भिड़ंत की शुरुआत

अप्रैल 2024 में दमिश्क स्थित ईरानी दूतावास पर इज़राइल के कथित हमले के बाद ईरान ने पहली बार इज़राइल पर सीधे हमला किया 13 अप्रैल 2024 को ईरान ने 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइल इज़राइल की ओर दागे

इज़राइल ने इनमें से अधिकांश को Iron Dome और Arrow डिफेंस सिस्टम से रोक लिया

यह पहली बार था जब ईरान और इज़राइल आमने-सामने भिड़े थे

13 जून 2025: ऑपरेशन ‘Rising Lion

13 जून की रात इज़राइल ने ईरान के भीतर एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की, जिसे ‘Operation Rising Lion’ नाम दिया गया। इज़राइली वायुसेना और खुफिया एजेंसी मोसाद ने मिलकर हमला किया

इसे भी पढ़ें- ग़ज़ा युद्ध 2025: नेतन्याहू ने युद्ध खत्म करने की शर्तें रखीं, अस्थायी संघर्षविराम को तैयार

टारगेट बनाए गए: नतांज, फोर्डो, इस्फहान और तेहरान के बाहरी क्षेत्र

हमला ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को निशाना बनाकर किया गया इज़राइल ने दावा किया कि उसने ईरान की परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

तेहरान में दहशत और पलायन

इज़राइल के हमले के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया था। कई रिहायशी इलाकों में धमाके हुए अस्पतालों में जगह कम पड़ गई और ब्लड बैंकों में संकट देखा गया 1 लाख से अधिक नागरिकों ने राजधानी से पलायन किया
ईरान ने भी जवाबी हमला करते हुए इज़राइल की सैन्य चौकियों पर मिसाइलें दागीं।

अमेरिका शुरू से ही इज़राइल के समर्थन में खड़ा रहा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खुलेआम इज़राइल की कार्रवाई का समर्थन किया और ईरान को चेतावनी दी। अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में B-2 बॉम्बर, एयरक्राफ्ट कैरियर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए अमेरिकी कांग्रेस में इस पर बहस शुरू हो गई थी कि क्या सरकार को युद्ध की मंज़ूरी के लिए वोट कराना चाहिए अमेरिका ने इज़राइल को हथियार, तकनीक और इंटेलिजेंस सपोर्ट भी दिया

क्या ये तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?

ईरान, ग़ज़ा, लेबनान और इज़राइल के बीच यह युद्ध अब क्षेत्रीय सीमा पार करने लगा है। रूस और चीन ने अब तक आधिकारिक रूप से हस्तक्षेप नहीं किया है, लेकिन वे स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं संयुक्त राष्ट्र की शांति अपीलों का कोई असर नहीं हुआ है अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ग़ज़ा में हो रहे हमलों को “जनसंहार” कहा है

युद्ध अब रुकेगा नहीं, बढ़ेगा

मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष अब केवल सीमा विवाद नहीं रहा।
यह अब सामरिक, धार्मिक और राजनीतिक लड़ाई बन चुका है जिसमें बड़े देश शामिल हो रहे हैं।
अगर जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष वैश्विक युद्ध में तब्दील हो सकता है।

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