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लखनऊ की महापौर के आवास पर विवाद के बाद सियासत तेज, भारी संख्या में महिलाओं और पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में 22 अप्रैल, 2026 को हुई एक घटना ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। शहर की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल के कैम्प कार्यालय/आवास पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से किए गए आपत्तिजनक व्यवहार को लेकर सियासी माहौल लगातार गरम बना हुआ है। इस घटना के विरोध में 25 अप्रैल को जी.पी.ओ. स्थित महात्मा गांधी जी की प्रतिमा पर पर्वतीय समाज, सैन्य समाज तथा भूतपूर्व सैनिकों द्वारा एक विशाल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें भारी संख्या में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 22 अप्रैल की सुबह कुछ व्यक्तियों ने महापौर के आवास पर पहुंचकर उनके नाम के शिलापट्ट के साथ अभद्रता की, उस पर कालिख पोती और “मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए। इस दौरान कथित रूप से असंसदीय भाषा का प्रयोग किया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जनमानस में आक्रोश फैल गया और विभिन्न संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की।

शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन में पर्वतीय समाज और सैन्य समाज की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसके साथ ही पूर्व सैनिक भी महापौर के सम्मान में सड़कों पर उतरे और उन्होंने इस घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें शामिल लोगों के चेहरे पर आक्रोश साफ झलक रहा था।

प्रदर्शन के बाद सभी लोग जी.पी.ओ. से जिला अधिकारी (डीएम) को ज्ञापन सौंपने के लिए रैली के रूप में उनके आवास की ओर बढ़े। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस ने डीआरएम कार्यालय के आगे बैरिकेडिंग कर रैली को आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान कुछ देर के लिए हल्का तनाव का माहौल भी बना, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने संयम बनाए रखा।

इसके बाद मौके पर पहुंचे एसीपी हजरतगंज को प्रदर्शनकारियों ने डीएम के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। साथ ही, जनप्रतिनिधियों की गरिमा की रक्षा और कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की भी मांग उठाई गई।

इस प्रदर्शन में कई प्रमुख सामाजिक एवं संगठनात्मक प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें गणेश चंद्र जोशी जी, चेतन सिंह बिष्ट जी, कैलाश उपाध्याय जी, हरीश पंत जी, हिमांशु पाण्डेय, दीवान सिंह अधिकारी जी, के.एन. चंदौला, गोपाल सिंह गैलाकोटी, चित्रा कांडपाल, नेहा सिंह, समता बाफिला, जानकी अधिकारी जी एवं विनय सूदन जी प्रमुख रूप से शामिल रहे।

प्रदर्शन के दौरान गणेश चंद्र जोशी जी ने कहा, “यह घटना केवल एक जनप्रतिनिधि का नहीं, बल्कि पूरे लखनऊ की जनता के सम्मान का अपमान है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।”

चेतन सिंह बिष्ट जी ने अपने वक्तव्य में कहा, “लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन इस तरह की अभद्रता और असंसदीय व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है। यह राजनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

वहीं नेहा सिंह ने कहा, “आज बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतरी हैं, क्योंकि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा का भी है। हम चाहते हैं कि प्रशासन सख्त कदम उठाए और ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगे।”

मनीष मिश्रा
राज्य संवाददाता,
सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल

मनीष मिश्रा पिछले 7 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।

Mishra Manish

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