बढ़ते गंगा जलस्तर के कारण पांचवीं बार बदला मां गंगा की आरती का स्थान

वाराणसी। मां गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की आरती का स्थान एक बार फिर बदलना पड़ा। जलस्तर बढ़ने के कारण दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं और आरती स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर गंगा सेवा निधि ने आरती को पांचवीं बार नए स्थान पर कराने का निर्णय लिया है। अब मां गंगा की आरती दशाश्वमेध घाट स्थित गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर सम्पन्न कराई जा रही है।
मंगलवार को भी दशाश्वमेध घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां गंगा की आरती के दर्शन के लिए पहुंचे। हालांकि गंगा का पानी सीढ़ियों से ऊपर पहुंच जाने के कारण घाट पर पहले की तरह आरती देखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सीमित जगह को देखते हुए आयोजकों ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आरती स्थल को छत पर स्थानांतरित किया।
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मां गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर काफी ऊपर पहुंच चुका है, जिससे घाट पर आरती के लिए उपलब्ध स्थान बेहद सीमित हो गया है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की संख्या लगातार अधिक रहने के कारण घाट की जगह छोटी पड़ रही थी। ऐसे में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर मां गंगा की आरती कराने का निर्णय लिया गया।
आरती स्थल बदलने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाट और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचकर मां गंगा के दर्शन और आरती में शामिल हुए। छत से विधि-विधान और पारंपरिक स्वरूप के साथ मां गंगा की आरती सम्पन्न कराई गई।
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए घाटों पर लगातार सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की ओर से श्रद्धालुओं से सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा नदी के बढ़े जलस्तर के बीच गंगा के निकट जाने से बचने की अपील की जा रही है। वाराणसी के प्रमुख घाटों पर जलस्तर बढ़ने के साथ ही सामान्य गतिविधियों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।
गंगा सेवा निधि की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरती स्थल में बदलाव किया गया है। जलस्तर सामान्य होने के बाद ही आरती को पुनः घाट पर पुराने स्थान पर आयोजित किए जाने की संभावना है।




