उन्नाव:- पर्यावरण संरक्षण को शुद्ध देसी गाय के गोबर से बने उप्पल और बल्ले, हुवा होलिका दहन।।


उन्नाव से अनुज तिवारी की रिर्पोट…
गंगाघाट। पर्यावरण का ख्याल रखते हुए बनाई इको फ्रेंडली होली का दहन शुद्ध देसी गाय के गोबर से बने गो कास्ट उपले व बल्ले बनाए गए जिसमें गोमय के साथ-साथ गूगल लोबान नीम की पत्ती हर्बल जड़ी बूटियां भी डाली गई है जिससे कि वातावरण शुद्ध हो इन वस्तुओं का बनाने का उद्देश्य भी वृक्षों का कटान रोकना और गोबर से बने वस्तुएं होली के दहन पर बेचने का काम करते हैं इससे गांव में रोजगार भी श्रजन होता है।
गूगल लोबान नीम की पत्ती हर्बल जड़ी बूटियां डालने से जो नकारात्मक उर्जा है वह नष्ट होती है और सकारात्मक ऊर्जा का उद्भव होता है जो 5 फुट ऊंची और 5 फुट चौड़ी यह होलीका है। होलिका दहन के उपरांत नगर के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से दानिश खान, सुशील शुक्ला, अनुज तिवारी, तारिक निजामी, राजन कनौजिया, राजेश सिंह ब्यूरो गंगा घाट आदि सम्मानित लोग उपस्थित हुए।।
होली के माध्यम से दिखाई तुर्की की भयावतावैसे तो होली की ज्वाला में कलेश, वैमनष्य , भेद भस्म करने की मान्यता है, लेकिन कानपुर की होलिकाये खासतौर पर इन मान्यताओं को साकार कर रही है, जिन मुस्लिम इलाको में हिन्दू आबादी नगण्य रह गयी है, लेकिन वंहा बसे मुस्लिमो ने होलिका की रवायत टूटने नही दी। दशकों से यंहा सभी जनप्रतिनिधि जैसे लोग अपनी देखरेख में होलिका तैयार करते है।
हिन्दू वंहा होलिका जलाकर पूजा परिक्रमा करते है। शहर में 1931 के बाद कई बदलाव देखे, उसी साल दंगे हुए और लोगो ने पलायन कर लिया, मिश्रित आबादी वाले मोहल्लों से हिन्दू दूसरी जगह जाकर बस गए, मोहल्लों में होलिका की परंपरा ना टूटे, इसके लिए मुस्लिमो ने खुद होली लगवाने का इंतजाम संभाल लिया।
उन्नाव के गंगा घाट में लगभग 48 वर्षो से हिन्दू मुस्लिम मिलकर होलिका सजाते है, यंहा पर हर वर्ष होलिका को एक नई थीम के रूप में दर्शाया जाता है, इसबार इस होलिका में होलिका को दर्शाया गया है, साथ ही भूकंप आने पर किस तरह से अपना और दूसरो का बचाव करना है इसको भी दर्शाया गया है।


