Sewer Inspection या वार्ड की कुश्ती – क्लासिक चौराहे पर मचा ड्रामा!
Sewer Inspection Turns Into Political Drama at Classic Crossing – Ward Clash Unfolds!

पार्षदों की लड़ाई, जनता की दिक्कतों पर भारी
महानगर क्लासिक चौराहे पर सीवर और नाले का निरीक्षण करने पहुंचे नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने शायद सोचा होगा कि वे एक साधारण Sewer Inspection दौरे पर आए हैं। लेकिन जैसे ही वहां पहुंचे, उन्हें समझ में आ गया कि यह दौरा कम और ड्रामे का मंच अधिक है।
जैसे ही सीवर के गड्ढे का ढक्कन खुलने को हुआ, दो पार्षद – विवेकानंद पुरी वार्ड के सुनील शंखधर और महानगर वार्ड के हरिश्चंद्र लोधी – ने एक-दूसरे पर परिसीमन का गड्ढा खोद दिया। दोनों भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि हैं, लेकिन इस दिन पार्टी से ज्यादा अपनी-अपनी “पार्टी लाइन” तय करने में व्यस्त दिखे।
“किसका वार्ड, किसकी ज़िम्मेदारी?”
यह सवाल इतना जटिल हो चुका है कि डेढ़ साल बाद भी हल नहीं हुआ। नगर निगम के अधिकारी समझ रहे थे कि यहां सीवर का समाधान होगा, लेकिन यहां तो “सीमाओं” का विवाद चल रहा था। दोनों पार्षदों ने नगर आयुक्त के सामने ऐसा झगड़ा किया कि अधिकारियों को लगा, वे किसी स्कूली बच्चों के झगड़े का निपटारा करने आए हैं।
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“कमीशन का खेल, जनता बेहाल”
क्षेत्र के लोग अपनी समस्याएं लेकर आए थे, लेकिन पार्षदों की प्राथमिकता सीवर की सफाई नहीं, बल्कि “ठेकेदार कौन लाएगा” तय करना थी। नगर आयुक्त निरीक्षण के लिए तैयार थे, लेकिन दोनों पार्षद अचानक इस जगह पर तब पहुंचे जब उन्हें भनक लगी कि अब काम का ठेका मिलेगा। असल खेल तो कमीशन का था, जिसमें “सीमा” बस एक बहाना थी।
जनता के लिए सीवर का पानी उतना बड़ा मुद्दा नहीं है जितना पार्षदों के बीच बहते हुए “कमीशन के दरिया” का। आखिरकार, नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह को निरीक्षण छोड़कर बीच-बचाव करते हुए लौटना पड़ा। इस पूरे तमाशे ने यह साफ कर दिया कि महानगर के सीवर से ज्यादा गंदगी राजनीति में भरी हुई है।
क्लासिक चौराहे का सबक:
पार्षदों को इस बात का पता नहीं है कि कौन सा क्षेत्र उनके वार्ड में आता है, लेकिन यह जरूर पता है कि ठेका किसके नाम होना चाहिए। जनता की समस्याएं भले ही अपनी जगह खड़ी रहें, लेकिन “कमीशन खोरी” के इस खेल में पार्षद हर बार आगे निकल जाएंगे।




