कोटद्वार विधानसभा सीट से सुरेन्द्र सिंह v/s धीरेन्द्र सिंह चौहान का महामुकाबला देखने को मिलेगा

कोटद्वार :- जिस प्रकार से अब 22 का चुनाव की तारिख सामने आती जा रही और भाजपा मे उम्मीदवारो की एक लम्बी कतार लग चुकी है वही वर्तमान विधायक डॉ. हरक सिंह रावत का कोटद्वार विधानसभा से चुनाव लड़ना बहुत ही मुश्किल लग रहा है वही अगर आप करे विपक्ष मे तोर पर ख़डी कांग्रेस की तो कांग्रेस से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी की भी चिंता कम होती नजर आ रही है वही सूत्रों की माने तो अगर कोटद्वार विधानसभा से अगर कांग्रेस की तो पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी को कोई बराबरी की टककर भाजपा से सिर्फ वर्तमान मे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह चौहान ही सुरेन्द्र सिंह नेगी को मात दे सकते है।
क्युकी यह कहना गलत नहीं होगा की धीरेन्द्र सिंह चौहान ने 2018 के नगर निगम के चुनाव अपना एक अलग ही दम ख़म दिखाया था वही बात करे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह चौहान की तो व है हर वर्ग है साथ हमेशा खडे रहते है और उनसे हमेशा रूबरू होते रहते है धीरेन्द्र सिंह चौहान का जनता के साथ एक अलग ही कनेक्शन देखने को हमेशा से मिलता आया है वही ज़ब हमारी बात भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह चौहान से हुई तो उनका कहना है भाजपा एक लोकतान्त्रिक अनुसासित पार्टी है अगर पार्टी चाहेगी तो में चुनाव लडूगा। वही चौहान का कहना है की ज़ब तक प्रत्याशीयो के नाम की घोषणा नहीं हो जाती है तब तक कुछ कहना मुश्किल है वही चौहान का कहना है पार्टी में जिस प्रकार से पार्टी के कार्य करता अपनी अपनी दावेदारी कर रहे है अच्छा लग रहा है और पार्टी के कार्य कर्ताओ को अपनी दावेदारी करने का पूरा हक है टिकट देना ना देना व पार्टी हाई कमान का फैसला है वही जिस प्रकार से चौहान के अपनी पूरी बेबाकी से सवालो के जवाब देते नजर आ रहे है उससे तो यही नजर आ रहा है की 22 की पूरी तैयारी के साथ चौहान चुनाव में कूद चुके है अब ये देखना होगा की भाजपा हाई कमान किसको टिकट देती है किसको नहीं,वही अगर भाजपा धीरेन्द्र सिंह चौहान को कोटद्वार विधानसभा से टिकट देती है तो भाजपा और कांग्रेस में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है
वही भाजपा की बात करे तो भाजपा ने 2018 के नगर निगम चुनाव में पूर्व जिलाध्यक्ष पर धीरेन्द्र सिंह चौहान पर भरोसा ना जताते हुए दूसरे को टिकट दे दिया था तो नगर निगम चुनाव में हार का मुँह देखना पड़ा था खेर चुनाव को चौहान भी हार गए थे पर जो दूसरे केंडिडेट को पड़े व वोट इधर पड़ जाते तो भाजपा का पहला मेयर कोटद्वार विधानसभा से नगर निगम में होता वही इस बार भी चौहान ने साफ साफ शब्दों में कहना की अगर जनता चाहेगी तो 22 के चुनाव में निर्दलीय भी जाऊंगा और लडूंगा।




