मौनपालन ने बदली किसान की तकदीर, पहली बार में 1.25 लाख का मुनाफा

धान-गेहूं और गन्ने की पारंपरिक खेती से आगे बढ़े शाहजहांपुर के वेदराम, 2.56 लाख की यूनिट पर मिला 1.28 लाख का अनुदान
खेती में बढ़ती लागत और सीमित आमदनी के बीच शाहजहांपुर के किसान वेदराम ने मौनपालन को आय का बेहतर जरिया बनाया है। तिलहर क्षेत्र के ग्राम ढका निवासी वेदराम ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत पॉलीनेशन सपोर्ट थ्रू बी-कीपिंग यानी मौनपालन इकाई स्थापित की। पहली बार उत्पादन में करीब 70 हजार रुपये खर्च करने के बाद सभी खर्च निकालकर उन्होंने करीब 1.25 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। सरकारी योजना के तहत उन्हें इकाई की लागत पर 1.28 लाख रुपये का अनुदान भी मिला।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न औद्यानिक विकास योजनाएं संचालित की जा रही हैं। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और विविध कृषि गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। शाहजहांपुर में भी अब किसान कम भूमि में अधिक आय देने वाली गतिविधियों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। मौनपालन इसी दिशा में किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है।
धान-गेहूं और गन्ने की खेती से शुरू हुआ सफर
तिलहर विकासखंड और तहसील क्षेत्र के ग्राम ढका निवासी किसान वेदराम पुत्र सियाराम पहले धान, गेहूं और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। इन फसलों से उन्हें सीमित आमदनी होती थी। खेती की लागत लगातार बढ़ने और आमदनी अपेक्षाकृत कम रहने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
इसी दौरान उन्होंने खेती में बदलाव करने का फैसला लिया। वेदराम ने उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी ली। जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक ने उन्हें एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत पॉलीनेशन सपोर्ट थ्रू बी-कीपिंग कार्यक्रम की जानकारी दी।
विभाग की ओर से उन्हें बताया गया कि योजना के तहत एक इकाई पर 50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। इस योजना से प्रेरित होकर वेदराम ने अपने प्रक्षेत्र पर मौनपालन इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया।
2.56 लाख की इकाई पर मिला 1.28 लाख का अनुदान
वित्तीय वर्ष 2025-26 में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत शाहजहांपुर जिले को सामान्य और अनुसूचित जाति/जनजाति किसानों के लिए मौनपालन इकाइयों का लक्ष्य मिला था। इसी के तहत वेदराम ने विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया और आवश्यक अभिलेख जमा किए।
योजना प्रभारी अनिल कुमार ने स्थलीय निरीक्षण कर उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। विभागीय मार्गदर्शन में वेदराम ने अपने प्रक्षेत्र पर मौनपालन इकाई स्थापित की। इसमें मधुमक्खी कॉलोनी, बी-हाइव और मौनपालन से संबंधित आवश्यक उपकरण लगाए गए।
वेदराम के अनुसार मौनपालन इकाई स्थापित करने में करीब 2.56 लाख रुपये की लागत आई। योजना के तहत उद्यान विभाग ने उन्हें 1.28 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया।
पहली बार में 70 हजार खर्च कर कमाए 1.25 लाख
मौनपालन इकाई स्थापित करने के बाद वेदराम ने पहली बार उत्पादन शुरू किया। उत्पादन के दौरान उनकी लागत करीब 70 हजार रुपये आई। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 1.25 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ।
पहले ही प्रयास में मिली इस सफलता से वेदराम का उत्साह बढ़ा है। उनकी मौनपालन इकाई अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कम भूमि और अपेक्षाकृत कम लागत में बेहतर आमदनी मिलने से दूसरे किसान भी इस गतिविधि को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं।
कम जमीन में शुरू हो सकता है मौनपालन
जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक के अनुसार मौनपालन के लिए किसानों को बड़ी कृषि भूमि की आवश्यकता नहीं होती। यही वजह है कि किसान और युवा इस व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जिले में मौनपालन की आठ इकाइयों के सफल संचालन से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। किसानों और युवाओं की बढ़ती रुचि को देखते हुए 10 अतिरिक्त मौनपालन यूनिट स्थापित किए जाने के लिए विभाग को अतिरिक्त लक्ष्य की मांग भेजी गई है।
नई इकाइयों की स्थापना से जिले में मौनपालन का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी
उद्यान विभाग की ओर से मौनपालन शुरू करने के इच्छुक किसानों और युवाओं को योजना, यूनिट स्थापना, तकनीक और सरकारी अनुदान की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसान मौनपालन जैसी गतिविधियों को अपनाकर इसे अतिरिक्त आय के साथ-साथ स्थायी आमदनी के साधन के रूप में विकसित करें।
विभागीय मार्गदर्शन से बढ़ा किसानों का भरोसा
वेदराम की सफलता में उद्यान विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक की ओर से किसानों को योजनाओं की जानकारी देने, आवेदन प्रक्रिया में सहयोग करने और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है।
जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के निर्देशन में जिले में किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उद्यान विभाग की योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इनका लाभ उठा सकें। योजनाओं की समय-समय पर समीक्षा कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
वेदराम की सफलता से दूसरे किसान भी प्रेरित
वेदराम की सफलता ने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ आय के नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। अब किसान बागवानी, नकदी फसलों और मौनपालन जैसी गतिविधियों की ओर रुचि दिखा रहे हैं। इससे खेती में विविधता आने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते खुल रहे हैं।
वेदराम की कहानी यह बताती है कि सही योजना, तकनीकी जानकारी, सरकारी सहायता और मेहनत के सहारे किसान खेती से बेहतर आमदनी हासिल कर सकता है। कम भूमि में शुरू होने वाला मौनपालन छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है।
वेदराम की सफलता उन किसानों के लिए भी संदेश है जो बढ़ती कृषि लागत और सीमित आमदनी से परेशान हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक कृषि गतिविधियों को अपनाया जाए तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।




