बाढ़ प्रभावित कसारी पहुंचे प्रभारी मंत्री, ग्रामीणों का जाना हाल; बोले- हर परिवार को मिलेगी मदद

जलभराव और आवागमन की स्थिति देखी, ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं; कोला विद्यालय में बांटी बाढ़ राहत राशन किट
उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और जिले के प्रभारी मंत्री नरेंद्र कश्यप ने सोमवार को जलालाबाद तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित ग्राम कसारी का निरीक्षण किया। उन्होंने जलालाबाद विधायक हरिप्रकाश वर्मा और जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के साथ गांव पहुंचकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
प्रभारी मंत्री ने गांव में जलभराव और आवागमन की स्थिति देखी। ग्रामीणों ने उन्हें बाढ़ के कारण संपर्क मार्ग पर हो रही परेशानी से अवगत कराया। ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को संपर्क मार्ग की दोनों ओर दीवारों का निर्माण कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि बाढ़ के पानी से मार्ग को नुकसान न पहुंचे और ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित न हो।
राहत कार्य में लापरवाही पर होगी सख्ती
प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों को जरूरत के अनुसार खाद्य सामग्री, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। जहां भी आवश्यकता होगी, वहां प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री ने जनहानि, पशुहानि और फसल क्षति का सर्वे कराकर पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने के भी निर्देश दिए।
ग्रामीणों से संवाद के दौरान मंत्री ने कहा कि बाढ़ की चपेट में आए परिवारों की मदद के लिए सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह उनके साथ खड़ा है। प्रभावित लोगों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाए और राहत सामग्री जरूरतमंद परिवारों तक समय से पहुंचाई जाए।




ग्रामीणों ने बांध बनाने की मांग उठाई
ग्राम कसारी के ग्रामीणों ने प्रभारी मंत्री के सामने गांव को बाढ़ से स्थायी रूप से बचाने के लिए बांध निर्माण की मांग रखी। ग्रामीणों ने कहा कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पर प्रभारी मंत्री ने आश्वासन दिया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद बांध निर्माण की कार्रवाई जल्द शुरू कराई जाएगी।
कोला विद्यालय में बांटी राहत राशन किट
निरीक्षण के बाद प्रभारी मंत्री कोला के विद्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को बाढ़ राहत राशन किट वितरित की। मंत्री ने स्वयं ग्रामीणों को राहत सामग्री प्रदान की और उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी ली।
राहत सामग्री प्राप्त करने वाले कुछ ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि बाढ़ के कारण उनके घर रहने लायक नहीं बचे हैं। इस पर प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों के रहने की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और आवश्यकतानुसार हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
19 गांव बाढ़ से प्रभावित, चार शरणालय संचालित
जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने प्रभारी मंत्री को जिले में बाढ़ की वर्तमान स्थिति और प्रशासन की ओर से किए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की टीमें लगातार भ्रमण कर रही हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने बताया कि वर्तमान में जलालाबाद तहसील के 19 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित क्षेत्रों में चार बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं और सभी चार शरणालय संचालित हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
98.5 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित
प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से कुल 98.5 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसमें 72.6 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि और 25.9 हेक्टेयर बोया गया क्षेत्र शामिल है। इसके अलावा 9.3 हेक्टेयर क्षेत्र में कटान की स्थिति दर्ज की गई है। फसल क्षति का अनुमानित मूल्य करीब 9.2 लाख रुपये आंका गया है।
प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी के लिए प्रशासन ने 13 बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए 30 नाव और 10 मोटर बोट उपलब्ध कराई गई हैं।
1,688 लोगों का हुआ उपचार
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी लगातार काम कर रही हैं। प्रशासन के अनुसार अब तक 1,688 लोगों का उपचार किया जा चुका है। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से 276 पशुओं का उपचार और 1,263 पशुओं का टीकाकरण किया गया है।
प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री भी वितरित की जा रही है। अब तक 330 खाद्यान्न पैकेट, 330 तिरपाल, 330 त्रिपाल/अन्य निर्धारित राहत सामग्री, 2,820 ओआरएस पैकेट और 1,450 क्लोरीन टैबलेट वितरित की जा चुकी हैं।
नियंत्रण कक्ष से रखी जा रही नजर
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं, पशु चिकित्सा, राहत सामग्री और बचाव संसाधनों की उपलब्धता पर लगातार निगरानी की जा रही है। जिला और तहसील स्तर पर नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।




