मथुरा बलदेव बिजली घर के अवर अभियंता अशोक शर्मा के उपभोक्ताओं से बिगड़े बोल
मथुरा, उत्तर प्रदेश।
बलदेव बिजली घर से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें अवर अभियंता अशोक शर्मा (JE) की अभद्र भाषा और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने क्षेत्र के उपभोक्ताओं को नाराज़ कर दिया है।
वायरल ऑडियो में साफ सुना जा सकता है कि बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ताओं से बात करते समय जेई अशोक शर्मा उन्हें अपशब्द कह रहे हैं और यह तक बोलते सुने गए —
“मैं किसी का नौकर नहीं हूं, रात में फोन मत किया करो।”
बिजली कटौती पर सवाल पूछना बना अपराध?
बलदेव क्षेत्र के लोग लगातार बिजली कटौती से परेशान हैं। जब उपभोक्ताओं ने बिजली न आने की शिकायत के लिए अशोक शर्मा जेई से संपर्क किया, तो उन्हें गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा।
रिकॉर्डिंग में स्पष्ट सुना गया:
“रात में कॉल मत किया करो, मैं तुम्हारा नौकर नहीं हूं।”
यह क्लिप अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है और जनता में गंभीर आक्रोश देखने को मिल रहा है।
उपभोक्ताओं की आवाज़ उठी – कहां है ‘उपभोक्ता देवो भव’?
बिजली विभाग के कार्यालयों में दीवारों पर ‘उपभोक्ता देवो भव’ जैसे स्लोगन भले ही लिखे हों, लेकिन व्यवहार में विद्युत कर्मचारी कैसे बर्ताव करते हैं — इसका उदाहरण बलदेव से मिला।
- महिलाओं के साथ भी अशोक शर्मा ने अशोभनीय भाषा का उपयोग किया।
- पीड़ितों का सवाल – अगर उपभोक्ता बिजली विभाग से शिकायत नहीं कर सकते, तो फिर किससे करें?
डायरेक्टर अजय अग्रवाल ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
हमारी संवाददाता ज्योति गुप्ता ने जब इस विषय पर दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के डायरेक्टर कमर्शियल अजय अग्रवाल से बात की, तो उन्होंने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
रिकॉर्डिंग में अजय अग्रवाल ने कहा:
“ऐसे व्यवहार बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, और आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
ऊर्जा मंत्री और विभागीय अध्यक्ष दे चुके हैं सख्त निर्देश
ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा और बिजली विभाग अध्यक्ष आशीष गोयल ने हाल ही में आयोजित वर्चुअल बैठकों में निर्देश जारी किए थे कि:
- बिजली से जुड़ी समस्याओं का समय पर निस्तारण हो।
- उपभोक्ता की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए।
- लापरवाह कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि क्या इन निर्देशों का पालन सिर्फ कागजों तक सीमित है या अशोक शर्मा जैसे अधिकारियों पर सख्ती से कार्रवाई होगी?
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क्यों जरूरी है कार्रवाई?
उत्तर प्रदेश में न जाने कितने अशोक शर्मा जैसे अवर अभियंता हैं जो जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर, उल्टे गाली-गलौज करते हैं। यदि सरकार ने एक पर उदाहरणात्मक सजा दी, तो बाकी कर्मचारी अपने व्यवहार में बदलाव लाने को मजबूर होंगे।
बिजली विभाग की विश्वसनीयता दांव पर
अगर विद्युत उपभोक्ताओं की शिकायतों का यही हाल रहा, तो जनता का विश्वास विभाग से उठ जाएगा।
‘उपभोक्ता देवो भव’ सिर्फ दीवारों तक सीमित रहेगा और भ्रष्टाचार व असंवेदनशीलता आम हो जाएगी।
अब जनता जवाब चाहती है
- क्या अशोक शर्मा पर विभागीय कार्रवाई होगी?
- क्या भविष्य में कोई उपभोक्ता बेइज्जती का शिकार नहीं होगा?
- क्या विभाग अपनी साख और ज़िम्मेदारी को गंभीरता से लेगा?
इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग कितना पारदर्शी और जवाबदेह है।


