काशी की गंगा आरती से जापानी डेलीगेट अभिभूत, विश्वस्तरीय पर्यटन के विकास पर मंथन


काशी की आध्यात्मिक भव्यता और गंगा आरती की अलौकिक छटा ने जापानी डेलीगेशन को अभिभूत कर दिया। काशी की संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से रूबरू हुए जापानी प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बीच शनिवार को काशी और सारनाथ को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को लेकर आयुक्त सभागार में महत्वपूर्ण बैठक हुई।
भारत सरकार के पर्यटन सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में स्टेकहोल्डर्स, टूरिज्म एसोसिएशन, विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने काशी और सारनाथ में प्रस्तावित पर्यटन विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
नगर आयुक्त ने पीपीटी के माध्यम से सीएसआर फंड के जरिए काशी के घाटों समेत अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों के कायाकल्प की योजनाओं को सामने रखा। उन्होंने बताया कि काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
योजना के तहत गलियों के सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास, मॉडल हेरिटेज गली विकास, घाटों पर सीसीटीवी कैमरे और पब्लिक एड्रेस सिस्टम की स्थापना, चेंजिंग रूम, एकीकृत साइनेज और चैंटिंग सिस्टम विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए गोल्फ कार्ट की व्यवस्था भी की जाएगी।
इसके अलावा विरासत भवनों के जीर्णोद्धार, पुराने घाटों पर हेरिटेज बिल्डिंग के रेस्टोरेशन, फूड एवं वेंडिंग जोन विकसित करने तथा सार्वजनिक शौचालयों को अपग्रेड करने पर भी जोर दिया गया। घाटों और आसपास की साफ-सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए 100 इलेक्ट्रिक स्कूटर की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया।
पर्यटन सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए फ्लोटिंग जेटी और एलईडी स्क्रीन लगाने के साथ ही गंगा नदी और वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से 100 से अधिक इलेक्ट्रिक नावों की व्यवस्था की योजना पर भी चर्चा हुई।

बैठक में विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं से इन परियोजनाओं में सीएसआर और अन्य माध्यमों से सहयोग करने का आह्वान किया गया। उद्देश्य है कि काशी की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन केंद्र बनाया जाए।
इस दौरान काशी की गंगा आरती का आकर्षण भी चर्चा के केंद्र में रहा। गंगा के तट पर होने वाली भव्य आरती, दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण ने जापानी डेलीगेशन को खास तौर पर प्रभावित किया। काशी की यह आध्यात्मिक अनुभूति विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन रही है।
बैठक में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा वीजा, इंडसइंड बैंक, मेक माय ट्रिप, अगोडा, ऐक्सीगो, कोका-कोला और इंडियन टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
काशी की गंगा आरती से अभिभूत जापानी डेलीगेशन और विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाओं के लिए तैयार हो रही योजनाएं इस बात का संकेत हैं कि काशी अब आध्यात्मिक पर्यटन के साथ-साथ वैश्विक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।



