जोन-7 में सफाई व्यवस्था बेपटरी: नालियों का पानी सड़कों पर, खाली प्लॉट बने ‘कूड़ाघर’; आखिर जिम्मेदार कौन?

इस्माईलगंज गांव, पटेल नगर और राजवीर नगर में गंदगी से लोग परेशान; डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पर सवाल, स्थानीय लोगों का आरोप—सफाई कर्मचारी नियमित नहीं पहुंच रहे

लखनऊ। राजधानी को स्वच्छ रखने के तमाम दावों के बीच लखनऊ नगर निगम के जोन-7 के इस्माईलगंज गांव, पटेल नगर और राजवीर नगर की तस्वीर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। कहीं नालियों का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है तो कहीं खाली प्लॉट कूड़े के ढेर में तब्दील होते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे और कूड़ा उठान तथा डोर-टू-डोर कलेक्शन व्यवस्था भी अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रही।

जोन 7 अवैध ठेले चलते हुए

🔴 इस्माईलगंज में सड़क पर नाली का पानी
इस्माईलगंज गांव में जलनिकासी और सफाई व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से कई स्थानों पर गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। लोगों का कहना है कि इससे न सिर्फ आवागमन मुश्किल हो रहा है, बल्कि दुर्गंध और मच्छरों के कारण आसपास रहने वाले परिवार भी परेशान हैं।

सवाल यह है कि जब नगर निगम सफाई और कूड़ा प्रबंधन पर लगातार संसाधन खर्च कर रहा है तो आबादी वाले इलाकों में नालियों और सड़कों की यह स्थिति क्यों बनी हुई है?
🔴 डोर-टू-डोर व्यवस्था कमजोर तो प्लॉट में पहुंचेगा कूड़ा?
राजवीर नगर में खाली प्लॉट में बड़ी मात्रा में कूड़ा जमा दिखाई दे रहा है। सुषमा हॉस्पिटल के पीछे भी खाली प्लॉट में कूड़ा और गंदगी जमा होने की शिकायत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन वाहन नियमित रूप से प्रत्येक घर तक पहुंचे और निर्धारित समय पर कूड़ा लिया जाए तो लोगों के सामने खाली प्लॉट में कूड़ा फेंकने की स्थिति ही पैदा न हो।

हालांकि सार्वजनिक या निजी खाली प्लॉट में कूड़ा डालना उचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन नगर निगम को यह भी देखना होगा कि घरों से नियमित कूड़ा संग्रह की व्यवस्था वास्तव में धरातल पर कितनी प्रभावी है।
🔴 एक ZSO और दो SFI के भरोसे पूरा जोन-7?
जोन-7 की सफाई व्यवस्था में उपलब्ध पर्यवेक्षण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए एक ZSO और दो SFI के माध्यम से बड़े क्षेत्र की व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने बड़े क्षेत्र में नियमित निरीक्षण, सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति, नालियों की सफाई और कूड़ा उठान की प्रभावी मॉनिटरिंग आखिर कैसे सुनिश्चित की जा रही है?

🔴 फाइलों से बाहर निकलकर जमीन पर व्यवस्था देखने की जरूरत
स्थानीय हालात जोनल स्तर की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि इस्माईलगंज गांव में नाली का पानी सड़क पर बह रहा है और राजवीर नगर व सुषमा हॉस्पिटल के पीछे खाली प्लॉट कूड़े से पट रहे हैं, तो केवल कार्यालयी रिपोर्ट और फाइलों के आधार पर सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मानी जा सकती।
नगर आयुक्त को जोन-7 की सफाई व्यवस्था का औचक स्थलीय निरीक्षण कराकर यह जांच करानी चाहिए कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन वाहन निर्धारित रूट पर कितने घरों तक पहुंच रहे हैं, सफाई कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति क्या है, नालियों की सफाई कब हुई और खाली प्लॉटों में लगातार कूड़ा जमा होने के लिए जवाबदेही किसकी है।
यदि कागजों में सफाई और कूड़ा उठान नियमित दिखाया जा रहा है, लेकिन जमीन पर तस्वीर इसके उलट है, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंसी की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। जोन-7 को अब फाइलों में नहीं, सड़कों और मोहल्लों में साफ दिखना चाहिए।




