राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अल्ट्रासाउंड के लिए लंबा इंतजार: एक–डेढ़ महीने की तारीख, तत्काल मरीज परेशान
Mishra Manish2 weeks agoLast Updated: March 30, 2026
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सीएम ने बांटे नियुक्ति पत्र, संस्थान ने गिनाईं उपलब्धियां; जमीनी हकीकत—महिला मरीजों को समय पर जांच नहीं
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। यहां अल्ट्रासाउंड जांच के लिए महिलाओं को एक से डेढ़ महीने बाद की तारीख दी जा रही है, जबकि कई मामलों में यह जांच तत्काल जरूरी होती है। इससे मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हर दिन सैकड़ों मरीज, लेकिन जांच की क्षमता सीमित
संस्थान के प्रवक्ता के अनुसार रोजाना करीब 1000 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं, जिनमें लगभग 500 मरीजों को अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है। लेकिन संसाधनों की कमी के चलते सभी मरीजों की समय पर जांच संभव नहीं हो पा रही है।
मशीनें प्रस्तावित, लेकिन प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव
सूत्रों के मुताबिक संस्थान में कुछ नई अल्ट्रासाउंड मशीनें लगाए जाने की योजना है, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि मौजूदा संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है और मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
उपलब्धियों के दावों के बीच सामने आई जमीनी हकीकत यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरएमएलआईएमएस में 665 नवनियुक्त नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए थे। इस दौरान संस्थान की उपलब्धियों और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना की गई थी। कार्यक्रम में आरएमएलआईएमएस को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का केंद्र बताया गया, जहां रोबोटिक सर्जरी और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया गया।
गर्भवती महिलाओं के लिए बढ़ रहा खतरा
हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर अल्ट्रासाउंड जांच न होना जोखिम भरा साबित हो सकता है। समय पर जांच न होने से जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: यह सिर्फ सुविधा नहीं, सुरक्षा का मुद्दा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्त्री एवं प्रसूति विभाग में अल्ट्रासाउंड जांच में देरी केवल असुविधा नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। समय पर जांच न होने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
बड़ा सवाल: दावे मजबूत या व्यवस्था कमजोर?
अब बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे कर रही है, तब प्रदेश के प्रमुख संस्थानों में ही आवश्यक जांच के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों हो रहा है?
क्या केवल नियुक्ति पत्र बांटने और उपलब्धियां गिनाने से स्वास्थ्य व्यवस्था सुधर जाएगी, या जमीनी स्तर पर संसाधनों और स्टाफ की कमी दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
मनीष मिश्रा राज्य संवाददाता, सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल
मनीष मिश्रा पिछले 7 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।