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उत्तर रेलवे लखनऊ: ‘शाही’ तमाशा! ठेकेदार पस्त, अवैध वसूली मस्त! #RailwayScam

लखनऊ। चारबाग रेलवे स्टेशन, जहां यात्रियों की सुविधा का जिम्मा रेलवे प्रशासन पर है, लेकिन यहां का असली ‘राजपाट’ तो किसी और के ही हाथ में है। पार्किंग का टेंडर तो 4.50 करोड़ रुपये में ADMS इंटरप्राइजेज को मिला, लेकिन वसूली की मलाई ‘शाही टेंपो एसोसिएशन’ के थाल में परोसी जा रही है।

यहां हर दिन एक नया तमाशा देखने को मिलता है—ठेकेदार परेशान, अधिकारी बेफिक्र और वसूली माफिया मालामाल। स्टेशन पर उतरते ही ऑटो चालकों से जबरन 60 रुपये वसूले जाते हैं, और यह पैसा किसी सरकारी खाते में नहीं, सीधे ‘शाही खजाने’ में पहुंच जाता है।

रेलवे टेंडर? असली ठेकेदार तो ‘शाही टेंपो एसोसिएशन’!

कागजों पर भले ही पार्किंग का अधिकार ADMS इंटरप्राइजेज के पास हो, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही कहानी सुनाती है। टेंडर के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाली कंपनी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। वजह? स्टेशन पर वसूली का असली खेल तो ‘शाही टेंपो एसोसिएशन’ ही चला रही है।

दिनभर में करीब 1000 ऑटो आते हैं और हर ऑटो से 60 रुपये की अवैध वसूली होती है। मतलब, रोजाना करीब 60,000 रुपये सीधे इस ‘शाही निज़ाम’ की जेब में जाते हैं। रेलवे प्रशासन, RPF और GRP सभी इस खेल को मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं।

अधिकारियों की ‘आंखें बंद’, माफिया की जेबें चेक-इन!

RPF, GRP और रेलवे प्रशासन का हाल देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी ने इनकी आंखों पर पट्टी बांध दी हो। शिकायतें होती हैं, लेकिन कार्रवाई? मानो चारबाग स्टेशन पर यह शब्द ही बैन कर दिया गया हो।

डीआरएम से गुहार, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात!

पार्किंग ठेकेदार अभिषेक दुबे ने उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम सचिंद्र मोहन शर्मा से मदद की गुहार लगाई है। लेकिन नतीजा वही—समिति बनाई गई, फीडबैक लिया जा रहा है, और समस्या… वही की वही।

रोजाना 95 हजार का नुकसान, पर ‘शाही व्यवस्था’ कायम!

पार्किंग में रोजाना 95 हजार रुपये का घाटा हो रहा है। ठेकेदार के लिए यह टेंडर अब ‘घाटे का सौदा’ बन गया है। वहीं, प्रीपेड टैक्सी, ऑटो स्टैंड और विज्ञापन होर्डिंग्स पर भी कब्जा जमाए बैठे लोग रेलवे प्रशासन के नाक के नीचे अपना ‘अवैध साम्राज्य’ चला रहे हैं।

समिति बनी, चर्चा हुई, लेकिन टेंपो माफिया के ‘शाही दिन’ जारी!

रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली देखकर यही लगता है कि नियम-कायदे सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए ही हैं। अवैध वसूली का यह शाही खेल खुलेआम जारी है और जिम्मेदार अधिकारी हर बार वही पुरानी धुन गुनगुनाते हैं—“जांच चल रही है।”

अब बड़ा सवाल यही है—क्या यह मामला भी बाकी घोटालों की तरह ‘रेलवे की फाइलों’ में दफ्न हो जाएगा? या फिर वाकई में कभी कोई कदम उठेगा?

क्योंकि चारबाग स्टेशन पर असली टिकट की जरूरत नहीं, यहां तो ‘शाही वसूली’ का पास जरूरी है!

मनीष मिश्रा

मनीष मिश्रा राज्य संवाददाता, सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल मनीष मिश्रा पिछले 5 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।

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