जोनल अधिकारी के दफ्तर के बाहर बदबूदार नालियां, खाली प्लॉटों में कूड़ा, झाड़ियों का कब्जा,विधायक की नाराजगी के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
लखनऊ । नगर निगम के जोन-3 की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अलीगंज वार्ड में, जहां पार्षद पृथ्वी गुप्ता कार्यकारिणी सदस्य भी हैं, वहीं जोनल कार्यालय से कुछ ही कदम की दूरी पर गंदगी का ऐसा आलम है कि नगर निगम के दावों की हकीकत साफ दिखाई देती है। मिलन पार्क के आसपास सड़क किनारे कूड़े के ढेर, खाली प्लॉटों में फैला कचरा, उगी हुई झाड़ियां और बदबू मारती नालियां स्थानीय लोगों के लिए रोज की परेशानी बन चुकी हैं।
🟪दफ्तर के नीचे ही बदबूदार नाला, खड़ा होना मुश्किल
सबसे चिंताजनक स्थिति जोन-3 कार्यालय के नीचे बह रही नाली की है। नाली से उठने वाली दुर्गंध इतनी तेज है कि कुछ मिनट तक वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जोनल अधिकारी अपनी गाड़ी का शीशा खोलकर कार्यालय तक जाएं तो उन्हें भी वास्तविक स्थिति का अंदाजा हो जाएगा। कार्यालय के बाहर वर्षों से बैठकर वकालत करने वाली महिला अधिवक्ता भी इस बदबू और गंदगी की समस्या की गवाह हैं।
🟪खाली प्लॉट बने कूड़ाघर, झाड़ियों ने बढ़ाई परेशानी
मिलन पार्क के आसपास कई खाली प्लॉट नगर निगम की अनदेखी के कारण अनौपचारिक डंपिंग ग्राउंड बन चुके हैं। अलीगंज सेक्टर बी में घरेलू कचरा, प्लास्टिक और निर्माण मलबा खुले में पड़ा है। लंबे समय से सफाई न होने के कारण झाड़ियां इतनी बढ़ चुकी हैं कि इनमें सांप और जहरीले जीवों के निकलने का भी खतरा बना हुआ है। बरसात के मौसम में यही हालात संक्रामक बीमारियों को भी न्योता दे रहे हैं।
🟪300 मीटर दूर पार्क के पीछे भी बदहाल हालात
जोनल कार्यालय से करीब 300 मीटर दूर चांदगंज गार्डन स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क के पीछे भी तस्वीर अलग नहीं है। नालियां गाद और कचरे से भरी हैं। सड़क किनारे कूड़ा फैला हुआ है और कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत होता है मानो महीनों से सफाई ही नहीं हुई। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नियमित सफाई केवल कागजों में दिखाई देती है।
🟪बैठकों में दावे, जमीन पर नतीजा शून्य
जोन-3 में लगातार समीक्षा बैठकों और सफाई व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कार्यालय के आसपास की बदहाली ही इन दावों की पोल खोल रही है। सवाल यह है कि जब नगर निगम अपने कार्यालय के आसपास सफाई सुनिश्चित नहीं करा पा रहा है तो पूरे जोन की व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
🟪लंबी टीम के बावजूद सवालों में सफाई व्यवस्था
जोनल अधिकारी मनोज यादव के पास जोनल अधिकारी के साथ-साथ जोनल सेनेटरी अधिकारी का भी अतिरिक्त प्रभार है। जोन में सफाई निरीक्षकों (SFI) और सफाई कर्मचारियों की लंबी टीम तैनात होने के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण सफाई व्यवस्था पूरी तरह लापरवाही का शिकार हो गई है।
🟪विधायक भी जता चुके हैं नाराजगी
क्षेत्रीय विधायक डॉ नीरज बोरा भी कई बार जोन-3 की सफाई व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं और अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का कहना है कि निर्देश केवल बैठकों तक सीमित रह जाते हैं।
🟪करोड़ों की व्यवस्था, फिर भी गंदगी से परेशान जनता
नगर निगम हर महीने सफाई व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च होने और नियमित भुगतान का दावा करता है, लेकिन धरातल पर हालात इसके बिल्कुल उलट दिखाई देते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जोन-3 कार्यालय से शुरू होकर फैजुल्लागंज क्षेत्र के वार्डों का निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाए तो सफाई व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी।
🟪कार्रवाई कब होगी जोन 3 में ?
नगर आयुक्त गौरव कुमार द्वारा समय-समय पर सफाई व्यवस्था सुधारने और जवाबदेही तय करने की बात कही जाती रही है। सफाई निरीक्षकों के तबादलों की चर्चा भी लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। ऐसे में सवाल यही है कि आखिर सफाई व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी कौन तय करेगा और शहरवासियों को गंदगी से कब राहत मिलेगी?
मनीष मिश्रा राज्य संवाददाता, सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल
मनीष मिश्रा पिछले 8 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, प्रदेश की राजनीति और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।