राजस्व निरीक्षक: नगर निगम की कुर्सी पर आराम या अपनी जेब में त्योहारी बौछार?
Revenue Drop in Lucknow Municipal Corporation: October Collections Slump, Are Revenue Inspectors Slacking

लखनऊ नगर निगम की आय में अक्टूबर माह में गिरावट: राजस्व निरीक्षक सो रहे हैं या सोने का सौदा कर रहे हैं?
लखनऊ नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह जहाँ नगर निगम की आय को सातवें आसमान तक पहुँचाने के सपने देख रहे हैं, वहीं कुछ राजस्व निरीक्षक शायद अपनी आरामकुर्सी से आगे सोचने को तैयार ही नहीं हैं। नगर निगम की आय उनके लिए शायद किसी आराम की छुट्टी की तरह हो गई है। आखिरकार, कुर्सी से उठने में जो मेहनत लगती है, वह काम के साथ भला कौन करे?
विशाल श्रीवास्तव, जो भरवारा मल्हौर और खरगापुर जैसे “विशाल” वार्ड देखते हैं, पिछले साल की तुलना में करोड़ों रुपये पीछे चल रहे हैं। भरवारा मल्हार में 1,69,60,014 रुपये और खरगापुर में 2,30,28,730 रुपये की वसूली में पिछड़ जाना—यह कोई मामूली बात नहीं। अब सवाल यह है कि यह लापरवाही है, या फिर राजस्व निरीक्षक का कोई “स्वर्णिम योजना” चल रही है, जिसका हिसाब-किताब सिर्फ उनकी जेब को मालूम है?
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राजा भैया, जो हजरतगंज के सबसे कद्दावर राजस्व निरीक्षक माने जाते हैं, उनकी भी धाक अब कमजोर पड़ती नजर आ रही है। पिछले साल की तुलना में वह भी 1,59,15,050 रुपये से पीछे चल रहे हैं। लगता है, निगम की आय के बजाय अपनी आय को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। आखिर त्योहारी सीजन जो है!
अक्टूबर माह में वसूली गई छुट्टी पर: त्योहारी बौछार या लापरवाही की मार
अब अगर हम पिछले साल अक्टूबर की तुलना इस साल अक्टूबर से करें, तो मामला और भी दिलचस्प हो जाता है। पिछले साल जहाँ राजस्व वसूली ने छलांग लगाई थी, इस साल देखकर लगता है कि हमारे निरीक्षक महोदय कहीं छुट्टी पर चले गए हैं। या फिर त्योहारी बोनस उन्होंने निगम की बजाय खुद ही रख लिया है?
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हालाँकि, सभी निरीक्षक ऐसे नहीं हैं। कुछ ऐसे भी कर्मठ राजस्व निरीक्षक हैं जिन्होंने नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह के 1000 करोड़ के लक्ष्य को पाने के लिए जी-जान लगा दी। उनके वार्ड में पिछले साल की तुलना में इस साल शानदार प्रदर्शन हुआ है। इन्हें देखकर तो यही लगता है कि अगर सबकी यही रफ्तार होती, तो निगम की आय चाँद पर पहुँच जाती।
अब मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह इस ‘निगम-नीति’ की जांच करेंगे कि आखिरकार राजस्व वसूली में इतनी गिरावट क्यों हो रही है। सवाल यह है कि कहीं ये निरीक्षक अपनी आय के पीछे निगम की आय को तो नहीं भुला बैठे?




