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RBI Monetary Policy 2025: RBI की रेपो रेट में 0.50% कटौती से सस्ते होंगे लोन

RBI Monetary Policy 2025: रेपो रेट में 0.50% की कटौती, सस्ते हो सकते हैं होम लोन और EMI! जानें पूरी रिपोर्ट

लखनऊ। 6 जून 2025
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी द्वैमासिक समीक्षा बैठक में आम जनता को बड़ी राहत दी है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट (0.50%) की कटौती की घोषणा की गई। इस फैसले के बाद अब रेपो रेट 6.00% से घटकर 5.50% पर आ गया है।

यह घोषणा उन लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है जो Home Loan, Auto Loan, या अन्य कर्ज लेने की योजना बना रहे हैं। रेपो रेट घटने से उम्मीद की जा रही है कि बैंक अब सस्ते ब्याज दरों पर ऋण प्रदान करेंगे, जिससे EMI का बोझ घटेगा

रेपो रेट में कटौती का सीधा फायदा होम लोन लेने वालों को

इस फैसले के बाद होम लोन की ब्याज दरों में गिरावट देखने को मिल सकती है। खासकर पहली बार घर खरीदने वालों के लिए यह मौका बेहतर साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब लोग कम EMI पर लोन प्राप्त कर सकेंगे, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी।

CRR में भी 100 आधार अंकों की कटौती, बैंकिंग सिस्टम में आएगी 2.5 लाख करोड़ की तरलता

RBI ने कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) में भी 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर उसे 4% से घटाकर 3% कर दिया है। यह कटौती 6 सितंबर, 4 अक्टूबर, 1 नवंबर और 29 नवंबर को चार चरणों में 25-25 अंकों में लागू की जाएगी।
इससे बैंकिंग प्रणाली में 2.5 ट्रिलियन रुपये की तरलता आएगी, जिससे बैंक क्रेडिट ग्रोथ को बल मिलेगा और ऋण लेना और भी सस्ता हो सकेगा।

आर्थिक विकास पर क्या होगा असर? GDP अनुमान 6.5% पर बरकरार

RBI ने मौद्रिक नीति के अंतर्गत भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान वर्ष 2025-26 के लिए 6.5% पर स्थिर रखा है। तिमाही अनुमान निम्नलिखित हैं:

  • Q1: 6.5%
  • Q2: 6.7%
  • Q3: 6.6%
  • Q4: 6.3%

मार्च 2025 की तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.4% रही, जो बीते चार तिमाहियों में सबसे तेज थी।

शेयर बाजार और जनता पर क्या पड़ेगा असर?

जैसे ही रेपो रेट में कटौती की घोषणा हुई, Indian Stock Market में तेजी देखी गई। Sensex और Nifty दोनों में उछाल आया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि RBI की रेपो रेट में कटौती का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। इससे न केवल होम लोन और ऑटो लोन की EMI घटेगी, बल्कि खुदरा और कॉर्पोरेट उधारकर्ता दोनों को राहत मिलेगी।

इसे भी पढ़ें- YES Bank के शेयरों में 7% की भारी गिरावट, निवेशकों में हड़कंप

रेपो रेट क्या है? कैसे प्रभावित करता है आम जनता को?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। यदि RBI रेपो रेट कम करता है, तो बैंक भी अपने ग्राहकों को सस्ते दरों पर लोन देने लगते हैं।
रेपो रेट में कमी का अर्थ है:

  • लोन सस्ता
  • EMI कम
  • बाजार में तरलता ज्यादा
  • आर्थिक गतिविधियों में तेजी

CRR यानी Cash Reserve Ratio क्या होता है?

CRR (नकद आरक्षित अनुपात) वह न्यूनतम नकदी राशि होती है जो बैंकों को RBI के पास सुरक्षित जमा करनी होती है।
CRR में कटौती का सीधा असर बैंकिंग सेक्टर की ऋण देने की क्षमता पर होता है। जब CRR कम होता है, तो बैंक अधिक मात्रा में ऋण देने में सक्षम होते हैं।

सस्ते लोन और बढ़ती क्रेडिट ग्रोथ की ओर एक और कदम

भारतीय रिजर्व बैंक की रेपो रेट में कटौती और CRR में बदलाव देश की आर्थिक गति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे जहां जनता को सस्ते लोन मिलेंगे, वहीं बैंकिंग सेक्टर की कार्यक्षमता और तरलता में इज़ाफा होगा।

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