साफ सड़कों पर भ्रष्टाचार की खुदाई: लखनऊ में नगर निगम की अनोखी कलाकारी का पर्दाफाश
Excavation of Corruption on Clean Roads: The Unique Artistry of Lucknow Municipal Corporation
साफ सड़कों पर भ्रष्टाचार की खुदाई: लखनऊ के मोतीझील में नगर निगम लखनऊ की अनोखी कलाकारी
मोतीझील जहां सड़कें चलने के लिए होती हैं, वहीं लखनऊ के नगर निगम का मानना है कि वे खुदाई और मरम्मत के लिए भी बनी हैं। मोतीझील कॉलोनी में एक साफ-सुथरी और दुरुस्त सड़क को तोड़कर दोबारा बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है। स्थानीय निवासी अमित अग्रवाल ने इस कारनामे को ‘भ्रष्टाचार का खेल’ करार दिया है और आरोप लगाया है कि नगर निगम के अधिकारी और नेता मिलकर जनता के पैसे का ‘बंदरबांट’ कर रहे हैं।
जोन- 2 के अधिकारियों का ‘सड़क ज्ञान’ या ‘धन ज्ञान’?
नगर निगम जोन-2 के प्रभारी अधिशासी अभियंता अशोक यादव ने इस मामले को अनदेखा करने का नया रिकॉर्ड बना दिया है। वहीं, जूनियर इंजीनियर की ‘मिलीभगत’ ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि इस ‘सड़क पुनर्निर्माण’ के खेल में कोई कसर न छूटे। सवाल उठता है कि अगर सड़क पर जलभराव नहीं हो रहा था, किसी को परेशानी नहीं थी, तो क्यों इस सड़क को तोड़कर दोबारा बनाया जा रहा है?
महापौर का ‘रोड रजिस्टर’ आदेश हवा में!
महापौर सुषमा खर्कवाल ने नगर निगम को ‘रोड रजिस्टर’ बनाने का निर्देश दिया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस सड़क का निर्माण कब हुआ और उसकी स्थिति क्या है। लेकिन, लगता है यह आदेश ‘जोन 2’ में किसी फाइल के नीचे दबा पड़ा है। अगर यह रजिस्टर होता, तो पता चल जाता कि जिस सड़क पर अभी ‘चमचमाती’ परत चढ़ाई गई थी, उसे दोबारा बनाने की जरूरत क्यों पड़ी।
अमित अग्रवाल का सवाल: जरूरतमंद इलाकों का क्या?
स्थानीय निवासी अमित अग्रवाल ने व्यंग्यात्मक लहजे में सवाल उठाया, “नगर निगम शायद इस बात से डरता है कि कहीं यह सड़क ज्यादा दिनों तक ठीक रही, तो ठेकेदारों और अधिकारियों के ‘लाभ’ में कमी आ जाएगी। क्या यह पैसा उन इलाकों में नहीं लगाया जा सकता, जहां सड़कें सच में टूटी-फूटी हैं या जहां नालियां सही करने की जरूरत है?”
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नगर आयुक्त से जांच की मांग
इस पूरे मामले पर नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। यह जानना बेहद जरूरी है कि ‘अच्छी सड़कों की खुदाई’ आखिर किस ‘सड़क नीति’ का हिस्सा है।
“लखनऊ में ‘सड़क सुधार योजना’ का मतलब अब ‘साफ सड़कों को दोबारा तोड़ने’ की कला हो गई है। नगर निगम की यह ‘कला’ देखकर जनता हैरान है। क्या नगर निगम को ‘सड़क कला सम्मान’ मिलना चाहिए?”
सड़क के इस ‘मूक गवाह’ ने यह रिपोर्ट भेजी है। पाठकों की राय का इंतजार है – आखिर क्या है ‘सड़क सुधार’ का सही मतलब?




