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आरआर विभाग में टेंडर आवंटन पर सवाल, मिलीभगत के आरोपों से घिरा केंद्रीय कार्यशाला संचालन

नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला में टेंडर आवंटन पर उठे सवाल, दो फर्मों तक सिमट रहा काम?

इनपैनल कई फर्में, लेकिन काम सीमित ठेकेदारों को मिलने के आरोप; मैकेनिकल कार्य में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की भूमिका पर भी सवाल, जांच की उठी मांग।

लखनऊ। नगर निगम के आरआर विभाग (केंद्रीय कार्यशाला) में टेंडर प्रक्रिया और कार्य आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार विभाग में नगर निगम की जेसीबी, हाइवा, ट्रैक्टर, ट्रॉली सहित अन्य भारी वाहनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए 8 से 9 फर्में इनपैनल हैं, लेकिन अधिकांश कार्य लगातार केवल सुपर स्पेयर और एसएस नामक दो फर्मों को दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि कार्य आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। विभाग में फोरमैन ललित मिश्रा की नियुक्ति होने और उन्हें तकनीकी कार्यों के आवंटन के लिए अधिकृत किए जाने के बावजूद वास्तविक निर्णय दूसरे स्तर से लिए जा रहे हैं।

🟥 मैकेनिकल कार्य में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की भूमिका पर भी सवाल

सूत्रों के अनुसार आरआर विभाग में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर शोएब अख्तर मैकेनिकल इंजीनियरिंग से जुड़े कार्यों का संचालन और अनुमोदन कर रहे हैं। इसे लेकर विभागीय स्तर पर भी चर्चा है कि तकनीकी जिम्मेदारियों का यह स्वरूप स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप है या नहीं। आरोप है कि मुख्य अभियंता मनोज प्रभात और संबंधित अधिकारी की मिलीभगत से टेंडर की शर्तों एवं कार्य आवंटन की प्रक्रिया में बदलाव कर चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता का गंभीर मामला हो सकता है।

🟥 हजारों लीटर डीजल/तेल निर्गमन पर भी उठे सवाल

सूत्रों के हवाले से एक अन्य मामला भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि आरआर विभाग द्वारा जिन बड़े नालों की सफाई कराई जाती है, उनका अधिकांश कार्य अब लगभग समाप्ति की ओर है। इसके बावजूद विभाग से प्रतिदिन हजारों लीटर डीजल/तेल निर्गत होने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि इस निर्गमन पर संबंधित अधिकारी शोएब अख्तर के हस्ताक्षर हो रहे हैं। यदि ऐसा है तो यह जांच का विषय है कि कार्य लगभग समाप्त होने के बाद भी इतनी बड़ी मात्रा में ईंधन की आवश्यकता किस आधार पर पड़ रही है।

🟥 जांच से ही सामने आएगी सच्चाई

इन सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि टेंडर प्रक्रिया, कार्य आवंटन और ईंधन निर्गमन के रिकॉर्ड की तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराई जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष लिया जाना शेष है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

मनीष मिश्रा
राज्य संवाददाता,
सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल

मनीष मिश्रा पिछले 8 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।

Mishra Manish

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