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नगर निगम जोन-6 में सफाई व्यवस्था बेपटरी, बढ़ा खर्च लेकिन सड़कों से नहीं हट रहा कूड़ा

LSA पर सवाल: लाखों के भुगतान के बावजूद मुख्य मार्गों पर गंदगी, जोन-4 से आए जोनल इंचार्ज राजकरण की तैनाती के बाद भी नहीं बदले हालात

लखनऊ। नगर निगम के जोन-6 में सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मुफ्तीगंज चौकी बस मंडी मेन रोड, कोणेश्वर मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर, कामाख्या हॉस्पिटल के पास तथा बड़ा इमामबाड़ा के दूसरे गेट के सामने सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क सफाई से लेकर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन तक की व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है।

🟥 मुख्य मार्गों पर कूड़ा, डोर-टू-डोर व्यवस्था भी लड़खड़ाई

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिन सड़कों पर प्रतिदिन सफाई होनी चाहिए, वहां कई-कई दिनों तक कूड़ा पड़ा रहता है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन भी समय पर नहीं हो रहा, जिससे लोग मजबूर होकर सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंक रहे हैं और गंदगी लगातार बढ़ रही है।

🟥 लाखों का भुगतान, लेकिन जमीनी हालात निराशाजनक

इन क्षेत्रों की सफाई का जिम्मा लखनऊ स्वच्छता अभियान प्राइवेट लिमिटेड (LSA) के पास है। आरोप है कि कंपनी को हर महीने लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन उसके अनुरूप सफाई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। लोगों का कहना है कि जब नगर निगम स्वयं यह कार्य कर रहा था, तब अपेक्षाकृत कम खर्च में भी सफाई व्यवस्था कहीं बेहतर थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि खर्च बढ़ाने का आखिर जनता को क्या लाभ मिला?

🟥 जोनल सेनेटरी अफसर का तबादला, निगरानी भी कमजोर

सूत्रों के अनुसार, जोनल सेनेटरी अफसर के अंडर ट्रांसफर होने के कारण एजेंसी पर प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है। वहीं क्षेत्र के सफाई निरीक्षक भी कंपनी की कार्यप्रणाली पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखा रहे हैं। इससे एजेंसी की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में आ गई है।

🟥 जोन-4 के बाद अब जोन-6 में भी वही तस्वीर

चर्चा का विषय यह भी है कि जोन-4 में कार्यप्रणाली को लेकर सवालों में रहे जोनल इंचार्ज राजकरण को जोन-6 की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन जिम्मेदारी बदलने के बाद भी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा। लोगों का कहना है कि यदि व्यवस्था नहीं बदलनी थी, तो केवल अधिकारियों का स्थानांतरण करने का क्या औचित्य है?

🟥 नगर आयुक्त और महापौर के अभियान पर पड़ रहा असर

एक ओर नगर आयुक्त शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार निरीक्षण और कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं महापौर लखनऊ को स्वच्छ सर्वेक्षण में देश के अग्रणी शहरों में शामिल कराने के लिए प्रयासरत हैं। लेकिन जोन-6 की बदहाल तस्वीर इन प्रयासों को कमजोर करती नजर आ रही है। यदि निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो स्वच्छ लखनऊ का सपना प्रभावित हो सकता है।

🟥 अब जवाबदेही तय करने का समय

नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब केवल सफाई कराने की नहीं, बल्कि निजी एजेंसी, जोनल इंचार्ज, जोनल सेनेटरी अफसर और सफाई निरीक्षकों की जवाबदेही तय करने की है। आखिर जब भुगतान बढ़ गया, संसाधन बढ़ गए और निजी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंप दी गई, तब भी यदि जनता को बेहतर सफाई नहीं मिल रही, तो जिम्मेदार कौन है? यही सवाल अब शहरवासी नगर निगम से पूछ रहे हैं।

मनीष मिश्रा
राज्य संवाददाता,
सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल

मनीष मिश्रा पिछले 8 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।

Mishra Manish

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