पिछली लोक अदालत में 22 हजार न्यायिक मुकदमे निपटे, 4.50 लाख प्रकरणों का हुआ निस्तारण

62 करोड़ रुपये की रिकवरी, 17 हजार से अधिक नोटिस तामील; इस बार पिछले रिकॉर्ड से अधिक डिस्पोजल का लक्ष्य
सहारनपुर। जिला न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में अपने मामलों के निस्तारण के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में वादकारी पहुंचे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सहारनपुर की ओर से आयोजित लोक अदालत का उद्देश्य आम जनता को शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना रहा।
जिला जज सत्येंद्र कुमार ने बताया कि समाज के निराश्रित, वंचित और निर्धन लोगों को शीघ्र एवं सस्ता न्याय उपलब्ध कराने की संकल्पना को साकार करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है। लोक अदालत में ऐसे मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है, जिनका कानूनी रूप से समझौते के माध्यम से समाधान संभव है।
उन्होंने बताया कि मोटर वाहन से संबंधित मामलों, श्रम कानूनों से जुड़े मामलों, दिवानी मामलों सहित विभिन्न प्रकार के प्रकरणों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का प्रयास है कि अधिक से अधिक वादकारियों को लोक अदालत का लाभ मिल सके।
अपर जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिकारी आशुतोष तिवारी ने बताया कि पिछली राष्ट्रीय लोक अदालत में करीब 22 हजार न्यायिक मुकदमों का निस्तारण किया गया था। प्री-लिटिगेशन और लंबित मामलों को मिलाकर कुल करीब 4.50 लाख प्रकरणों का निस्तारण हुआ था। इसके साथ ही लगभग 62 करोड़ रुपये की रिकवरी भी की गई थी।
उन्होंने बताया कि इस बार लोक अदालत को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। करीब 17 हजार से अधिक नोटिसों की तामील कराई गई है। बैंकों से भी अनुरोध किया गया है कि पात्र लोगों को नियमानुसार अधिक से अधिक छूट प्रदान की जाए। विशेष रूप से ब्याज में छूट और निर्धारित मानकों के अनुसार राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
लोक अदालत में पारिवारिक विवाद, संपत्ति विवाद और बंटवारे से जुड़े मामलों का भी अधिक से अधिक निस्तारण कराने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार पिछले लोक अदालत की तुलना में अधिक मामलों का निस्तारण होगा।
लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति और सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का समाधान होने से वादकारियों को लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।













