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ढाई साल से लंबित पांच दिवसीय बैंकिंग को लेकर बैंककर्मियों का शांतिपूर्ण मार्च,

“सहमति का सम्मान करो, पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करो” के नारों से गूंजा एटा।

एटा, 11 सितंबर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर शुक्रवार को देशभर के बैंक अधिकारी और कर्मचारी पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहे। एटा में भी बैंककर्मियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पदयात्रा निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। बैंककर्मियों ने स्पष्ट कहा कि वे कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि पूर्व में हुई लिखित सहमति को लागू करने की मांग कर रहे हैं।

📷- एटा में बैंक हड़ताल के दौरान अपनी मांगों को लेकर मीडिया से बात करते बैंककर्मी।
2015 में मिला था आश्वासन, 2024 में बनी लिखित सहमति
बैंक संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि मई 2015 में बैंक यूनियनों के आंदोलन के बाद सरकार की ओर से द्वितीय और चतुर्थ शनिवार को अवकाश लागू किया गया था। साथ ही शेष शनिवार को अवकाश देने का आश्वासन अगले वेतन पुनरीक्षण में लागू करने की बात कही गई थी।
इसके बाद 8 मार्च 2024 को 12वें द्विपक्षीय समझौते/9वें संयुक्त नोट में इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच सभी शनिवार को अवकाश सहित पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी थी। इसे छह माह के भीतर लागू किया जाना था।
समझौते में ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने पर भी सहमति बनी थी, जिससे बैंकिंग सेवाओं और ग्राहकों के काम पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
बैंककर्मियों का कहना है कि लिखित सहमति हुए करीब ढाई साल बीतने के बावजूद पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू नहीं हुई है।

📷- केनरा बैंक सिविल लाइंस के बाहर एकत्र बैंक अधिकारी और कर्मचारी।

वार्ता विफल होने के बाद हड़ताल का फैसला
बैंक संगठनों के अनुसार मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय में 8 और 9 सितंबर को DFS, IBA और बैंक यूनियनों के बीच कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद बैंक कर्मचारियों ने एक दिन के वेतन का त्याग करते हुए राष्ट्रव्यापी हड़ताल में भाग लिया।
बैंककर्मियों ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू होने से ग्राहकों को मिलने वाली सुविधाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। वर्तमान समय में UPI, ATM, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसी सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं। इसके अलावा सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
केनरा बैंक से माया पैलेस तक निकाली पदयात्रा
एटा में बैंककर्मियों ने केनरा बैंक सिविल लाइंस शाखा से आगरा रोड होते हुए माया पैलेस चौराहे तक शांतिपूर्ण पदयात्रा निकाली। इस दौरान कर्मचारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करने और भेदभावपूर्ण पीएलआई व्यवस्था समाप्त करने की मांग को लेकर नारे लगाए।
पदयात्रा में CBOA क्षेत्रीय सचिव प्रभात कुमार, सहायक क्षेत्रीय सचिव हेमंत कुमार, जिला सचिव एटा अवधेश कुमार, जिला सचिव कासगंज चंद्रवीर, चेयरमैन एसके वर्मा, AIBEA क्षेत्रीय सचिव विकास कुमार, सचिव अंकित यादव, जिला सचिव मैनपुरी राहुल सिंह चौहान समेत बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।

📷- पदयात्रा के दौरान नारेबाजी करते बैंक अधिकारी और कर्मचारी।

“लिखित समझौते का सम्मान होना चाहिए”
UFBU पदाधिकारियों ने कहा कि बैंककर्मियों की लड़ाई ग्राहकों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी केवल अपने जायज अधिकार और लिखित समझौते के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं। हम केवल 2015 के आश्वासन और 8 मार्च 2024 को हुई लिखित सहमति को लागू करने की मांग कर रहे हैं। जब छह माह में इसे लागू करने पर सहमति बनी थी तो ढाई वर्ष बाद भी इसका क्रियान्वयन क्यों नहीं हुआ?”
पदाधिकारियों ने कहा कि अब बैंककर्मी और इंतजार करने के पक्ष में नहीं हैं। सरकार और संबंधित संस्थाओं को लिखित सहमति का सम्मान करते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था जल्द लागू करनी चाहिए।

📷- यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स का हड़ताल संबंधी बैनर।

PLI व्यवस्था में भेदभाव समाप्त करने की मांग
बैंककर्मियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग के साथ-साथ भेदभावपूर्ण PLI व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि सभी बैंककर्मियों के लिए समान और न्यायपूर्ण PLI व्यवस्था होनी चाहिए।

बैंककर्मियों की प्रमुख मांगें
पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था तत्काल लागू की जाए।
सभी शनिवार को बैंक कर्मचारियों के लिए अवकाश दिया जाए।
PLI में भेदभाव समाप्त किया जाए।
सभी बैंककर्मियों के लिए समान और न्यायपूर्ण PLI व्यवस्था लागू हो।
लंबित और अवशिष्ट मुद्दों का शीघ्र समाधान किया जाए।

📷- हड़ताल के चलते एटा में बंद नजर आई बैंक शाखा।

“सहमति हुई है, अब क्रियान्वयन चाहिए”
बैंककर्मियों ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि “सहमति का सम्मान करो, पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करो” और “सहमति हुई है—अब क्रियान्वयन चाहिए” जैसे नारे लगाए। कर्मचारियों ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को भी अन्य क्षेत्रों की तरह सप्ताह में दो दिन अवकाश की सुविधा मिलनी चाहिए।
एटा में प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। बैंक संगठनों ने कहा कि उनकी मांगों का समाधान बातचीत के माध्यम से ही किया जाना चाहिए और पूर्व में हुए समझौते को लागू करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

📷- एटा में बैंककर्मियों का सामूहिक प्रदर्शन।

UP News Bureau

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