लखनऊ नगर निगम: विकास या भ्रष्टाचार? फर्जी फाइलों और गड़बड़ियों का खुलासा
Municipality Corruption: Fake Files and Mismanagement in Lucknow Municipal Corporation

लखनऊ नगर निगम में फर्जी फाइलों का खेल: सरोजिनी नगर में विकास या भ्रष्टाचार?
लखनऊ। नगर निगम के जोन 5 में अभियंत्रण विभाग ने विकास कार्यों की फाइलों में ऐसी “क्रिएटिविटी” दिखाई है, जो सवालों के घेरे में है। सरोजिनी नगर द्वितीय के नाम पर फाइलें और टेंडर बनाए गए, लेकिन काम कहीं और हो रहा है। दिलचस्प बात यह है कि फाइलों में राम रक्षा नगर जैसे स्थानों का जिक्र है, जो अस्तित्व में ही नहीं हैं। यह गड़बड़ी नगर निगम के विकास कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
काल्पनिक विकास और जिम्मेदारों की चुप्पी
नगर निगम के अधिशासी अभियंता एससी सिंह, जो इस कार्य के प्रमुख अधिकारी थे, किसी भी सवाल का जवाब देने से कतराते हैं। वहीं, महापौर सुषमा खर्कवाल की निधि से हो रहे इन कार्यों पर उनकी चुप्पी और जवाबदेही की कमी लोगों में निराशा पैदा कर रही है। क्या महापौर को इस गड़बड़ी की जानकारी नहीं, या इसे अनदेखा किया जा रहा है?

नगर आयुक्त की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर सवाल
नगर आयुक्त की जीरो टॉलरेंस नीति अब जीरो एक्शन में बदलती दिख रही है। अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता एससी सिंह और जूनियर इंजीनियर उमेश पाल कार्य पूरा कर जोन से हट चुके हैं, जिससे जांच की प्रक्रिया भी कठिन हो गई है।
जनता के साथ धोखा या नया ट्रेंड?
फाइलों और टेंडरों के इस खेल में जनता ठगी जा रही है। सरोजिनी नगर के निवासियों को अब तक यह समझ नहीं आया है कि फाइलों में दिखाए गए विकास कार्य उनके क्षेत्र में क्यों नहीं हो रहे।
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भ्रष्टाचार पर कब लगेगा लगाम?
इस पूरे मामले से साफ है कि नगर निगम का भ्रष्टाचार और लापरवाही जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी पर गहरा सवाल खड़ा करते हैं। क्या लखनऊ को इसी “गौरवशाली विकास” के लिए स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया गया है?
सरकार और स्थानीय प्रशासन को जल्द से जल्द इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। वरना “काल्पनिक विकास” का यह खेल शहर की साख को और ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा।




