जलकल विभाग की नाकामी पर फूटा पार्षदों का दर्द, गंदे पानी से त्रस्त जनता पूछ रही, कौन देगा जवाब?
नगर आयुक्त की बैठक हो या सैकड़ों शिकायती पत्र — जीएम साहब के कानों तक नहीं पहुंच रही ‘पानी की पुकार’

लखनऊ। एक ओर राजधानी लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के कई मोहल्ले पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। भवानीगंज वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि संतोष राय ने जलकल विभाग की घोर लापरवाही पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि “हमने न सिर्फ पत्राचार किया, बल्कि नगर आयुक्त की मीटिंग में भी पानी की विकराल समस्या को उठाया , पर जीएम साहब अब भी नींद में हैं या शायद AC ऑफिस से बाहर निकलना उनके एजेंडे में नहीं है।”
संतोष राय का कहना है कि मेहंदीगंज, पुराना हैदरगंज और भवानीगंज जैसे इलाकों में या तो पानी है ही नहीं, और जहां है भी, वहां नालियों जैसा गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। जल स्तर हर जगह नीचे जा चुका है, फिर भी जलकल विभाग ने अब तक सिर्फ “एक समरसेबल की खानापूर्ति” की है वो भी जैसे एहसान कर दिया हो।
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पार्षद प्रतिनिधि की पीड़ा यहीं खत्म नहीं होती। “जनता सीधे हमसे सवाल कर रही है, ‘भइया पार्षद जी, पानी कब आएगा?’ और हमारे पास जवाब नहीं, क्योंकि जो देना था, वो जलकल विभाग ने डुबो दिया है – पानी के साथ-साथ अपनी साख भी।”
इस पूरे मुद्दे पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि
क्या अब शिकायत करने के लिए जनता को समरसेबल की जगह लाउडस्पीकर लगवाना पड़ेगा, ताकि महाप्रबंधक साहब तक आवाज़ पहुंचे?
जलकल विभाग की यह कार्यप्रणाली बताती है कि उन्हें न धरातल की चिंता है और न धरती के नीचे जा चुके पानी की। ऐसा लगता है कि अब विभाग का नया नारा यही है
गहराई नापते रहो, पानी खुद ढूंढ लो!


