अतिवृष्टि से बरेली में दो लोगों की मौत, 39 मकान क्षतिग्रस्त

जलभराव वाले इलाकों में युद्धस्तर पर पानी की निकासी, फसल और मकान क्षति का सर्वे शुरू, प्रभावितों को दी जाएगी राहत राशि
उत्तर प्रदेश के जनपद बरेली में लगातार हुई अतिवृष्टि के बाद कई क्षेत्रों में हालात बिगड़ गए हैं। बारिश के कारण जलभराव, मकान क्षति और फसलों को नुकसान की सूचनाएं सामने आ रही हैं। अतिवृष्टि से जिले में अब तक दो लोगों की मौत की सूचना है, जबकि तहसीलों की ओर से पोर्टल पर 39 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दर्ज कराई गई है। जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। राजस्व विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही हैं।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह और जिला प्रशासन की टीम पूरे जिले में उत्पन्न परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रही है। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारियों, उपजिलाधिकारियों, तहसील स्तरीय अधिकारियों, विद्युत विभाग, नगरीय निकायों के अधिशासी अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। बारिश, जलभराव, मकान क्षति, फसल क्षति और पशुहानि समेत अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी लगातार जुटाई जा रही है।
खपरैल गिरने से महिला की मौत
अतिवृष्टि के दौरान मीरगंज तहसील क्षेत्र के गोरा लोकनाथपुर में खपरैल गिरने से फूला देवी की मौत हो गई। बताया गया कि बारिश के दौरान मकान की खपरैल गिर गई, जिसकी चपेट में आने से महिला की जान चली गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक और राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की।
वहीं नवाबगंज तहसील के मिर्जापुर जागीर में 26 सितंबर को कृपाल सिंह पुत्र रूम सिंह इन्वर्टर ठीक कर रहे थे। इसी दौरान बिजली आपूर्ति शुरू होने से उन्हें करंट लग गया। गंभीर हालत में उन्हें तत्काल एसआरएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार को उनकी मृत्यु हो गई।
प्रशासन की ओर से दोनों मामलों की आवश्यक रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। मृतकों के परिजनों को नियमानुसार अनुमन्य राहत राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।
39 मकानों की क्षति की सूचना
जिले की विभिन्न तहसीलों से अब तक 39 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना पोर्टल पर दर्ज कराई गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल लगातार प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर रहे हैं। राजस्व टीमें मौके पर पहुंचकर मकानों की क्षति का सत्यापन और आकलन कर रही हैं।
अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही रिपोर्ट के आधार पर क्षति का विवरण तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है। सत्यापन के बाद पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी निकालने के निर्देश
अत्यधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारियों को तत्काल पानी की निकासी कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित इलाकों में आवश्यक संसाधनों के माध्यम से जलनिकासी का काम कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण करें और किसी भी प्रकार की जनहानि या अन्य नुकसान की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचें।
बारिश के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में विद्युत विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त तार, ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरणों को ठीक करने में जुटी हैं। अधिकारियों को विद्युत आपूर्ति बहाल करने के साथ ही सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।
गौशालाओं की भी लगातार निगरानी
अतिवृष्टि के बीच निराश्रित गोवंश की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और उनकी टीम जिले की गौशालाओं का लगातार निरीक्षण कर रही है। गौशालाओं में चारा, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है, ताकि बारिश के कारण गोवंश को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
अतिवृष्टि के कारण पशुहानि के मामलों में भी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
फसल नुकसान का भी होगा सर्वे
बारिश से किसानों की फसलों को हुए संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीमें क्षेत्र में सक्रिय हैं। लेखपाल और अन्य राजस्व कर्मचारी खेतों में पहुंचकर फसल क्षति का सर्वे कर रहे हैं। निर्धारित समयावधि में सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशासन के अनुसार जिन मामलों में 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल क्षति पाई जाएगी, उनमें पात्र किसानों को नियमानुसार राहत राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण करते रहें। जनहानि, पशुहानि, मकान क्षति, जलभराव अथवा किसी अन्य नुकसान की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य कराया जाए। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा, समयबद्ध क्षति आकलन और पात्र परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराना है।




