Governance for Future: 25वें अंतर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन की प्रमुख झलकियां
Governance for Future: Highlights from the 25th International Conference of Chief Justices
Soochna IndiaNovember 23, 2024Last Updated: November 26, 2024
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25वीं अंतर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन: भविष्य की शासन प्रणाली पर जोर
लखनऊ। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (City Montessori School) में आयोजित 25वीं अंतर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीशों का सम्मेलन (25th International Conference of Chief Justices of the World), न्यायिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक अवसर बना। यह सम्मेलन, जिसका विषय “Governance for Future” था, दुनिया भर के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायविदों को एक मंच पर लेकर आया।
इस साल का यह सम्मेलन, जो 25th International Chief Justice Conference के नाम से भी प्रसिद्ध है, लखनऊ, भारत में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल द्वारा आयोजित किया गया। इस वैश्विक आयोजन में दुनिया भर से आए न्यायमूर्ति और न्यायविदों ने भाग लिया, जिससे यह सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया।
योगी आदित्यनाथ का उद्घाटन और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (@myogiadityanath) ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने अपने संबोधन में भारत के शाश्वत दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की प्रासंगिकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा,
“यह सम्मेलन विश्व शांति और मानवता की सेवा के लिए भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन में मौजूद मुख्य न्यायाधीशों से आग्रह किया कि वे एक न्यायपूर्ण और समानता पर आधारित समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
सम्मेलन की विशेषताएं
The International Conference of Chief Justices of the World (ICCJW) एक वार्षिक आयोजन है जिसमें न्यायमूर्ति और न्यायाधीश विभिन्न देशों से आकर मानव अधिकार, शिक्षा, और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। इस वर्ष के सम्मेलन में विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा हुई:
भविष्य की शासन प्रणाली (Governance for Future)
मानवाधिकार और न्याय प्रणाली का सशक्तिकरण।
बच्चों और युवाओं के लिए सुरक्षित भविष्य का निर्माण।
दुनिया भर के मुख्य न्यायाधीशों की भागीदारी
इस सम्मेलन में Chief Justices from around the globe ने भाग लिया। न्यायिक क्षेत्रों में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने वैश्विक स्तर पर न्याय व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की। यह सम्मेलन न्यायिक नेताओं के लिए एक अनूठा मंच है जो उन्हें सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए अपनी भूमिका समझने में सहायता करता है।
International Court of Justice (ICJ) Dalveer Bhandari का सम्मान
लखनऊ की महापौर और प्रथम नागरिक सुषमा खर्कवाल ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) के न्यायाधीश दलवीर भंडारी को लखनऊ की प्रतीकात्मक चाभी और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की पहल
सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, जो शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी है, ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया। #CMS #CMSeducation के तहत, यह सम्मेलन न केवल न्यायिक क्षेत्र को मजबूत करने का प्रयास करता है, बल्कि यह शिक्षा, मानव अधिकार, और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में भी जागरूकता फैलाता है।
CMS के संस्थापक डॉ. भारती गांधी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा,
“इस सम्मेलन का उद्देश्य न्याय और समानता को बढ़ावा देना और वैश्विक नागरिकता के विचार को प्रोत्साहित करना है।”
सम्मेलन का महत्व
The International Conference of Chief Justices of the World, 2024 वैश्विक स्तर पर शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास का प्रतीक है। यह सम्मेलन न्यायपालिका, सरकार और समाज के बीच सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर भविष्य मिले।
वसुधैव कुटुंबकम को समर्पित सांस्कृतिक कार्यक्रम
25वें अंतर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन के दौरान सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के छात्रों ने वसुधैव कुटुंबकम की भावना को समर्पित कई शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम को देश-विदेश से आए अतिथियों के साथ-साथ हज़ारों की संख्या में मौजूद अभिभावकों ने अत्यंत सराहा और प्रशंसा की।
समाप्ति और आगे की राह
25th International Conference of Chief Justices of the World ने यह दिखा दिया कि जब मुख्य न्यायाधीश और न्यायविद एक मंच पर आते हैं, तो न केवल विचारों का आदान-प्रदान होता है, बल्कि वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिए ठोस कदम भी उठाए जाते हैं। #UPCM और योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और प्रभावशाली बनाया।
यह सम्मेलन भारत की वैश्विक पहचान को भी बढ़ावा देता है और न्याय और समानता के क्षेत्र में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
“वसुधैव कुटुंबकम” का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन भारत में था। यह सम्मेलन इसका जीता-जागता उदाहरण है।