निराला नगर, जोन-3: स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई बयां करती गंदगी
Nirala Nagar Zone-3 A Reality Check on Swachh Bharat Mission

स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई पर सवाल उठाती गंदगी
लखनऊ। स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य देश के हर कोने को स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद बनाना है, लेकिन जब आप लखनऊ के निराला नगर, जोन-3 में जलकल कार्यालय के समीप स्थित पानी की टंकी परिसर में कदम रखेंगे, तो आपको इस उद्देश्य की हकीकत स्पष्ट नजर आएगी। गंदगी का ऐसा आलम है कि यहां कोई व्यक्ति दो मिनट भी खड़ा नहीं रह सकता। टूटी-फूटी टाइल्स, बदबूदार मल-मूत्र, और चारों ओर पसरी कचरे की दुर्गंध, स्वच्छता मिशन की जमीनी हकीकत को बयां करती है।
सफाई का दावा, हकीकत में गंदगी का पहाड़
टंकी परिसर की स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि नगर निगम ने इस क्षेत्र को अपनी सफाई सूची से हटा दिया है। फर्श पर बहता गंदा पानी और दीवारों पर जमी काई इस बात का संकेत देती है कि सफाई कर्मचारी यहां महीनों से नहीं आए। यहां की दुर्गंध इतनी तीव्र है कि आसपास के निवासी हर दिन एक नई परेशानी का सामना कर रहे हैं।
स्वच्छता अभियान: पोस्टरों में चमक, ज़मीन पर सन्नाटा
सरकार और नगर निगम के दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन यहां की स्थिति देखकर ऐसा लगता है जैसे स्वच्छता केवल नारों और विज्ञापनों तक ही सीमित रह गई है। क्या प्रशासन को इस जगह की सुध लेने के लिए किसी वीआईपी के दौरे का इंतजार है? या फिर यहां के नागरिकों को बीमारियों की चपेट में आने के बाद कोई कार्रवाई होगी?
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स्थानीय नागरिकों की परेशानी
यहां के स्थानीय नागरिकों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल कागजी आश्वासन ही मिले। सफाई न होने से यहां बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हमने कई बार नगर निगम से सफाई के लिए कहा, लेकिन हर बार हमें अनसुना कर दिया गया। अब हालत यह है कि हम खुद यहां आना पसंद नहीं करते।”
व्यंग्य के तीर, प्रशासन पर वार
क्या नगर निगम ने पानी की टंकी को साफ-सफाई की सूची से स्थायी रूप से हटा दिया है?
क्या सफाई कर्मियों के लिए चाय-पानी का ब्रेक इस गंदगी से अधिक जरूरी है?
क्या स्वच्छ भारत अभियान का पूरा बजट सिर्फ विज्ञापन और बैनर पर खर्च किया जा रहा है?
बीमारियों का निमंत्रण
यदि यहां जल्द सफाई नहीं की गई, तो यह स्थान महामारी का केंद्र बन सकता है। नगर निगम की लापरवाही न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों पर भी सवाल खड़ा करती है।
“स्वच्छ भारत, सिर्फ तस्वीरों में”
शायद नगर निगम को एक नया नारा अपनाना चाहिए—”स्वच्छ भारत, केवल पोस्टरों तक।” क्योंकि हकीकत में गंदगी ही यहां की पहचान बन चुकी है। प्रशासन को अब आंखें खोलनी होंगी और इस जगह को स्वच्छ बनाकर अपने वादों को पूरा करना होगा।




