गो आश्रय स्थलों में लापरवाही पर निदेशक सख्त, बोले-फंड रिक्वेस्ट समय से पोर्टल पर अपलोड करें

बारिश में चारे की दिक्कत दूर करने को बढ़ेगा भूसा भंडारण, साइलिज की व्यवस्था और सीसीटीवी से होगी निगरानी

गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के भरण-पोषण और बेहतर व्यवस्थाओं को लेकर पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने सख्ती दिखाई है। बुधवार को निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. राजेंद्र प्रसाद और अपर निदेशक पशुपालन, बरेली मंडल डॉ. मदन पाल ने बदायूं जिले में कई गो आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को गोवंश के लिए चारा, भुगतान और निगरानी व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. राजेंद्र प्रसाद और अपर निदेशक डॉ. मदन पाल ने विकासखंड उझानी के ग्राम पिपरौल में एफएमडी/एलएसडी टीकाकरण का सत्यापन किया। यहां पशु चिकित्सा शिविर का भी निरीक्षण किया गया। इसके बाद उझानी विकासखंड के अस्थाई गो आश्रय स्थल नौशेरा और सलारपुर विकासखंड के अस्थाई गो आश्रय स्थल ब्यौर का औचक निरीक्षण किया गया।
भुगतान में देरी रोकने के लिए समय से अपलोड हो फंड रिक्वेस्ट
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्देश दिए कि गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के भरण-पोषण के लिए फंड रिक्वेस्ट समय से पोर्टल पर अपलोड की जाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का सत्यापन और फंड रिक्वेस्ट भी समय से पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया, ताकि लाभार्थियों को भुगतान मिलने में किसी तरह की देरी न हो।
अधिकारियों ने संरक्षित गोवंश के लिए वर्षभर हरा चारा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों से हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए किए गए अनुबंधों की संख्या अभी काफी कम है। ऐसे में किसानों के साथ अधिक से अधिक अनुबंध जल्द पूरे किए जाएं, जिससे गो आश्रय स्थलों में पूरे साल हरे चारे की उपलब्धता बनी रहे।
बारिश में चारे की आपूर्ति बाधित न हो
अधिकारियों ने कहा कि जिन गो आश्रय स्थलों के संपर्क मार्ग ठीक नहीं हैं, उनके आसपास नैपियर समेत हरे चारे की बुवाई कराई जाए। इससे बारिश के मौसम में रास्ते खराब होने के बावजूद गोवंश के लिए चारे की व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।
जिन गो आश्रय स्थलों पर वर्षाकाल में भूसा और हरा चारा पहुंचाने में परेशानी होती है, वहां भूसा भंडारण की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही हरे चारे के विकल्प के तौर पर साइलिज का पर्याप्त भंडारण करने को कहा गया, ताकि आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी गोवंश को चारा उपलब्ध कराया जा सके।
सभी गो आश्रय स्थल सीसीटीवी से होंगे कवर
निरीक्षण के दौरान सभी गो आश्रय स्थलों को सीसीटीवी कैमरों से आच्छादित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि इन कैमरों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर जल्द से जल्द एक कंट्रोल रूम बनाया जाए। इससे गो आश्रय स्थलों की गतिविधियों और वहां संरक्षित गोवंश की व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा सकेगी।
अधिकारियों ने आगामी वर्षाकाल को देखते हुए जलभराव की आशंका वाले गो आश्रय स्थलों को भी चिह्नित करने के निर्देश दिए। ऐसे स्थलों पर यथासंभव ऊंचे चबूतरे का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के दौरान गोवंश को जलभराव की समस्या का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. प्रेम सिंह कोहली, उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनेक सिंह समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।




