बरेली आईवीआरआई व सीएसआईआर-आईआईटीआर के बीच एमओयू, विषविज्ञान और पशु चिकित्सा अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच प्रशिक्षण, ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त शोध को मिलेगा बढ़ावा
बरेली स्थित भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ के बीच बुधवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों संस्थानों के बीच यह समझौता वैज्ञानिक सहयोग और संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
एमओयू का आदान-प्रदान सीएसआईआर-आईआईटीआर के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण तथा आईसीएआर के उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान) एवं आईसीएआर-आईवीआरआई के निदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने किया। इस दौरान दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों और अधिकारियों की मौजूदगी में सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
संयुक्त शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान पर जोर
समझौते के तहत आईवीआरआई और सीएसआईआर-आईआईटीआर के बीच संयुक्त अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। दोनों संस्थान परस्पर हित से जुड़े वैज्ञानिक क्षेत्रों में मिलकर शोध कार्य कर सकेंगे। इसके साथ ही वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी अनुभव और अनुसंधान से जुड़ी जानकारियों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा।
एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों में सहभागिता बढ़ाने की योजना है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इससे शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ काम करने तथा नई शोध तकनीकों को समझने के अवसर मिलेंगे।
विषविज्ञान और पशु चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग
यह साझेदारी विषविज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान और इससे जुड़े विषयों में अंतर-संस्थागत अनुसंधान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए नए शोध क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं विकसित की जाएंगी।
समझौते से वैज्ञानिकों को साझा परियोजनाओं पर काम करने, शोध संसाधनों और ज्ञान का उपयोग करने तथा नवाचार को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। संस्थानों का मानना है कि इस प्रकार का सहयोग वैज्ञानिक उत्कृष्टता को मजबूत करने के साथ अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित करने में सहायक होगा।
कई वरिष्ठ वैज्ञानिक रहे मौजूद
एमओयू हस्ताक्षर समारोह में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व अपर महानिदेशक डॉ. देबब्रत कानुंगो की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अलावा सीएसआईआर-एनआईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम के पूर्व निदेशक तथा सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ की अनुसंधान परिषद के निवर्तमान एवं वर्तमान अध्यक्ष डॉ. जावेद इकबाल भी मौजूद रहे।
दोनों संस्थानों के बीच हुआ यह समझौता अनुसंधान, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सहयोग के लिए साझा मंच तैयार करेगा। इससे विषविज्ञान और पशु चिकित्सा विज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।




