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धर्म

शीतला अष्टमी कब, क्यों इसे कहते है बसौड़ा अष्टमी?

इसे शीतला अष्टमी और बसौड़ा अष्टमी भी कहा जाता है। बसौड़ा शीतला माता को समर्पित लोकप्रिय त्योहार है। ये पर्व होली के आठवें दिन मनाया जाता है।
मान्यता के अनुसार इस दिन पूजा के समय माता शीतला को पर मीठे चावलों का भोग लगाया जाता है। ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं। खासतौर पर इस दिन मां शीतला को बासी पकवानों का भोग लगाया जाता है। खुद भी बासी और ठंडा भोजन किया जाता है। इस वजह से इसे बासोड़ा अष्टमी भी कहा जाता है।

क्या है शुभ मुहूर्त और समय
इस साल शीतला अष्टमी 15 मार्च को है। शीतला माता की पूजा का मुहूर्त 15 मार्च की सुबह 06 बजकर 30 मिनट से शाम 06 बजकर 29 मिनट तक है।

क्या है पूजा विधि
इस दिन सुबह स्नान करें साफ कपड़े पहने।
हाथ में फूल, अक्षत, जल और दक्षिणा लेकर व्रत का संकल्प लें।
माता को रोली, फूल, वस्त्र, धूप, दीप, दक्षिणा और बसी भोग चढ़ाएं।
माता को दही, रबड़ी, चावल आदि चीजों का भी भोग लगाएं।
पूजा के समय शीतला स्त्रोत का पाठ और आरती करें।
पूजा के बाद माता का भोग खाकर व्रत खोलें।

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