बरेली: बीडीए विकास संवाद में उद्योगों की समस्याएं उठीं, नक्शा पास कराने से लेकर JE की कमी तक पर हुई चर्चा

औद्योगिक प्रतिनिधियों ने बताईं व्यावहारिक दिक्कतें, उपाध्यक्ष सौम्या पाण्डेय ने समयबद्ध निस्तारण के दिए निर्देश
बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से बुधवार को औद्योगिक प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के सदस्यों के साथ ‘बीडीए विकास संवाद’ आयोजित किया गया। बैठक की अध्यक्षता बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पाण्डेय ने की। करीब 10 औद्योगिक प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लेकर मानचित्र स्वीकृति, तकनीकी जांच, वैधानिक अनुमापनों और निर्माण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं सामने रखीं।
संवाद के दौरान प्रतिनिधियों ने प्राधिकरण के अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। संबंधित अधिकारियों ने कई मामलों में मौके पर ही आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई और समाधान बताया। जिन प्रकरणों का तत्काल निस्तारण संभव नहीं था, उनमें नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
FASTPAS और ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति पर चर्चा
बैठक में FASTPAS के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति, ऑनलाइन नक्शा पास कराने, प्लॉट्स के उप-विभाजन और Compounding Maps से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से उठीं। औद्योगिक प्रतिनिधियों ने प्रक्रियाओं में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों की जानकारी दी।
अधिकारियों ने संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं को समझाते हुए कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े मामलों में आवश्यक दस्तावेज और वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के साथ बेहतर समन्वय के जरिए प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सकता है।
JE की कमी से तकनीकी कार्य प्रभावित होने का मुद्दा
संवाद के दौरान बीडीए में पर्याप्त संख्या में जूनियर इंजीनियर (JE) उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। औद्योगिक प्रतिनिधियों ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण साइट निरीक्षण, स्वीकृत मानचित्रों की जांच और अन्य तकनीकी कार्यों में व्यावहारिक परेशानियां आती हैं।
इस पर प्राधिकरण की ओर से प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक कार्रवाई और संबंधित स्तर पर समन्वय का भरोसा दिया गया।
सड़क की चौड़ाई और सेटबैक मानकों पर हुआ मंथन
औद्योगिक भू-उपयोग से संबंधित विकास नियंत्रणों के साथ न्यूनतम सड़क चौड़ाई और सेटबैक के मानकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने औद्योगिक भवनों, MSME, Flatted Factories और Data Centres के लिए लागू प्रावधानों की जानकारी प्रतिनिधियों को दी।
प्रतिनिधियों की ओर से इन मानकों को लेकर सामने आने वाली व्यावहारिक स्थितियों से भी अधिकारियों को अवगत कराया गया।
Fire NOC और Completion Certificate पर जोर
औद्योगिक परियोजनाओं में Fire NOC, STP/WWTP संचालन, Aviation Safety Compliance और Completion Certificate जैसे वैधानिक अनुपालनों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं में आवश्यक एनओसी और अनुमतियां समय से प्राप्त की जानी चाहिए।
निर्माण पूरा होने के बाद Completion/Occupation Certificate प्राप्त करने की प्रक्रिया पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि परियोजनाओं में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
मॉर्गेज प्लॉट के Proportionate Release की जानकारी
बैठक में Mortgaged Plots के Proportionate Release की प्रक्रिया भी समझाई गई। अधिकारियों ने बताया कि आंतरिक विकास कार्यों की प्रगति और संबंधित अनुपालनों के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत मॉर्गेज किए गए प्लॉट को अनुपातिक रूप से रिलीज किए जाने की व्यवस्था है।
प्रतिनिधियों को इस प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक औपचारिकताओं और अनुपालनों की जानकारी दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन की दी जानकारी
संवाद के दौरान 9 जुलाई 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के संबंध में भी प्रतिनिधियों को जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि निर्माण परियोजनाओं में Completion/Occupation Certificate प्राप्त होने के बाद ही कब्जा हस्तांतरण किया जाना चाहिए।
साथ ही निर्माण अवधि के दौरान साइट पर स्वीकृत मानचित्र को प्रदर्शित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
RERA और BDA के नक्शे में सामंजस्य जरूरी
बैठक में RERA Registration और बीडीए से स्वीकृत मानचित्र के बीच सामंजस्य बनाए रखने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि स्वीकृत मानचित्र में किसी तरह का संशोधन होने की स्थिति में संबंधित RERA रिकॉर्ड को भी नियमानुसार अपडेट किया जाना आवश्यक है।
स्वीकृति से निर्माण पूरा होने तक प्रक्रिया सुगम बनाने पर जोर
‘बीडीए विकास संवाद’ में औद्योगिक क्षेत्र की जमीनी समस्याओं को सीधे समझने और उनके समाधान के लिए प्राधिकरण तथा उद्योग जगत के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में मानचित्र स्वीकृति, प्लॉट उप-विभाजन, FASTPAS, Compounding Maps, तकनीकी जांच, साइट निरीक्षण और विभिन्न वैधानिक अनुमापनों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर चर्चा हुई।
बीडीए की ओर से कहा गया कि ऐसे संवाद के माध्यम से औद्योगिक प्रतिनिधियों की व्यावहारिक समस्याओं को समझने और संबंधित मामलों में नियमानुसार समाधान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे उद्योग और प्राधिकरण के बीच संवाद को और मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।




