शाहजहांपुर: कारीगरों का हुनर देश की समृद्ध विरासत-वित्त मंत्री

विश्वकर्मा दिवस पर कारीगरों को मिली टूलकिट, गांधी भवन में हुआ आयोजन, 1,050 लोगों को मिला लाभ

भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर गुरुवार को गांधी भवन प्रेक्षागृह में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के तहत भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया गया। कार्यक्रम में कारीगरों और स्वरोजगार से जुड़े लाभार्थियों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ टूलकिट और प्रतीकात्मक चेक वितरित किए गए।

कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राज्यसभा सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया, महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता, सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्रनाथ वाल्मीकि, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी समेत जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में लाभार्थी मौजूद रहे।
भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और लाभार्थियों ने लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा।
सिलाई और हलवाई ट्रेड के लाभार्थियों को टूलकिट प्रदान की गई, जबकि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक वितरित किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विश्वकर्मा दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना पारंपरिक कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। इसके माध्यम से कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कारीगरों का हुनर देश की समृद्ध विरासत है। बदलते समय के साथ उनके सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करना जरूरी है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधनों से जोड़कर कारीगर अपने पारंपरिक हुनर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
2,477 युवाओं को मिला 99.32 करोड़ का बैंक ऋण
मंत्री ने जनपद में संचालित विभिन्न स्वरोजगार और औद्योगिक योजनाओं की प्रगति की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 2,477 लाभार्थियों को 99.32 करोड़ रुपये का बैंक ऋण और 9.93 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया है।
इसी तरह मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 561 लाभार्थियों को 49.60 करोड़ रुपये का बैंक ऋण और 12.40 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 436 इकाइयां स्थापित कर 1,308 लाभार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। इसके लिए 45.08 करोड़ रुपये का बैंक ऋण और 11.27 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया है।
वहीं एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) मार्जिन मनी योजना के तहत 251 लाभार्थियों को 17.84 करोड़ रुपये का बैंक ऋण और 4.60 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया।
6,525 कारीगरों को दी गई टूलकिट
मंत्री ने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत अब तक 6,525 लाभार्थियों को टूलकिट प्रदान की जा चुकी है। वहीं प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 1,654 प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
एक जनपद एक उत्पाद प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना के तहत भी 1,650 लाभार्थियों को टूलकिट प्रदान की गई है।
उन्होंने बताया कि जनपद में 73 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से 1,660.9 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुल 3,715 लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इसके अलावा यूपीडा की ओर से गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे तहसील जलालाबाद के चकगुलड़िया में 2.52 एकड़ भूमि पर आईएमएलसी स्थापित किया जा रहा है।
1,050 लाभार्थियों को अलग-अलग ट्रेड में मिला लाभ
जनपद में कुल 1,050 लाभार्थियों को विभिन्न ट्रेडों के अंतर्गत लाभान्वित किया गया। इनमें सिलाई ट्रेड के 525, हलवाई के 200, नाई के 25, धोबी के 25, लुहार के 50, मोची के 25, बढ़ई के 100, कुम्हार के 25 और राजमिस्त्री के 75 लाभार्थी शामिल हैं।
इस अवसर पर सिलाई और हलवाई ट्रेड से जुड़े लाभार्थियों को टूलकिट वितरित की गई।
पांच नए और नौ आधुनिक ट्रेड योजना में शामिल
मंत्री ने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में पहले से संचालित 11 पारंपरिक ट्रेडों के अलावा पांच नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े गए हैं। इनमें मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभुजा और मछुआरा शामिल हैं।
इसके साथ ही आधुनिक क्षेत्र के नौ विश्वकर्मा ट्रेड भी योजना में शामिल किए गए हैं। इनमें मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग, प्लंबिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी तथा ब्यूटी एवं वेलनेस जैसे काम शामिल हैं। इस तरह योजना के तहत कुल 25 ट्रेडों को लाभ दिया जा रहा है।
10 दिन का प्रशिक्षण, 15 हजार तक की टूलकिट
योजना के तहत लाभार्थियों को 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि में 5,000 रुपये का मानदेय तथा 15,000 रुपये तक की निःशुल्क टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है।
इसके अलावा लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण सहायता और 15 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। योजना का उद्देश्य कारीगरों को अपने हुनर को विकसित करने, स्वरोजगार शुरू करने और आय के साधन बढ़ाने में मदद करना है।
पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम में बताया गया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले पारंपरिक कारीगरों एवं श्रमिकों को उनके कौशल के अनुरूप प्रशिक्षण और सहायता दी जा रही है। इनमें बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लुहार, टोकरी बुनकर, सुनार, नाई, हलवाई, मोची, राजमिस्त्री और धोबी आदि शामिल हैं।
योजना के माध्यम से पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने के साथ कारीगरों की आय और जीवन स्तर में सुधार लाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
विश्वकर्मा सृजन और कौशल के प्रतीक: मिथिलेश कुमार
राज्यसभा सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, निर्माण और कौशल के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि कारीगरों और श्रमिकों को प्रशिक्षण, टूलकिट और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने से उनके हुनर को सम्मान मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के माध्यम से पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आवश्यक संसाधन और बेहतर अवसर मिलने पर कारीगर अपने हुनर के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के साथ जनपद और प्रदेश के आर्थिक विकास में योगदान दे सकेंगे।
कार्यक्रम में पारंपरिक कारीगरों के हुनर को सम्मान देने के साथ उन्हें प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का संदेश दिया गया। योजना के माध्यम से पारंपरिक कौशल को नई दिशा देने और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर रहा।




