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उन्नाव :- अतिक्रमण व ई रिक्शाओं के लगने वाले जाम से लोगों को दिलाई जाए मुक्ति।।

उन्नाव से अनुज तिवारी की रिर्पोट…

ई-रिक्शाओं के जाम से शहर बना नासूर यातायात नियमों की उड़ रही धज्जियां

मामला है गंगा घाट के अंतर्गत थाने के सामने का ..

सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए लोगों को शपथ दिला कर अधिकारियों द्वारा मानव श्रृंखला बनायी गई जिसके अंतर्गत लोगों को जागरूक किया गया. ताकि लोगों को यातायात नियमों का पालन करने की प्रेणा मिल सके तथा देश में होने वाली लगातार दुर्घटनाओं से लोगों को सावधान किया जा सके, जो वास्तव में ही काबिले तारीफ है लेकिन इसके अतिरिक्त अधिकारियों को अपना और दायित्व समझते हुए उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ रही ई रिक्शाओं की तादात से जिनके कारण हर गली नुक्कड़ चौराहे पर भायवह जाम की स्थिति बनी हुई है इस जाम से भी छुटकारा दिलाना चाहिए.

ई-रिक्शाओं के कारण हर गली हर नुक्कड़ हर चौराहे पर लगने वाले जाम से लोगों को निजात दिलाने के लिए एक और मानव श्रंखला बनानी चाहिए ताकि ई-रिक्शा संचालकों को भी सड़कों पर जाम ना लगाने के प्रति उन्हें जागरूक किया जा सके. शहर भर में ई-रिक्शा ओं के कारण लगने वाले जाम से हर कोई चिंतित मुद्रा में है, अपने रोजमर्रा के कार्य के लिए सड़कों पर निकलने वाले व्यापारियों, दुकानदारों, यहां तक कि अगर किसी व्यक्ति के घर में अचानक से कोई बीमार पड़ जाये और उसे एंबुलेंस में ले जाने की आवश्यकता हो तो साहब उस व्यक्ति का तो फिर भगवान ही मालिक है क्योंकि शहर के हर गली नुक्कड़ चौराहे पर ई रिक्शा की भरमार बड़ी तादाद में देखने को मिल रही है, जिनके कारण शहर भर में भयावह जाम की स्थिति बनी हुई है तो क्या अधिकारियों का दायित्व नहीं है कि इन ई रिक्शा संचालकों को भी एक मानव श्रंखला बनाकर इन्हें यातायात नियमों का पालन कराने की सीख दी जाए।

लोगों को जाम से निजात दिलाई जाए बताते चलें कुछ वर्ष पहले शहर में यातायात जाम की वजह अतिक्रमण, संकरी सड़कें, क्षतिग्रस्त रास्ते, बेतरतीब पार्किंग, विक्रमों, सिटी बसों की धींगामुश्ती और अवैध रूप से दौड़ रहे ऑटो रिक्शा को माना जाता था लेकिन अब इनमें कुछ वार्षो से और नाम जुड़ गया है यानी ई-रिक्शा। जिन्होंने शहर भर को जाम से ‘नासूर’ बना दिया है। शहर के सभी प्रमुख चौराहों से लेकर छोटी छोटी गलियों तक यह ई-रिक्शा न सिर्फ भीषण ट्रैफिक बल्कि आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन चुके हैं। बिना किसी रूट के हर चौराहे, गली तक पहुंचने वाले ई-रिक्शा का झुंड शहर में यातायात जाम की समस्या को और विकराल बना रहा है.

आरटीओ कार्यालय की और से बहुत समय पहले इन ई रिक्शाओं का रूट भी डायवर्जन किया गया था, लेकिन नतीजा क्या निकला सिफर वहीं अगर आरटीओ कार्यालय के मुताबिक बात की जाए तो अर्थात ई रिक्शाओं के बढ़ती हुई संख्या के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पिछले वर्ष के आंकड़ों की तुलना के अनुसार पंजीकृत ई रिक्शाओं की संख्या सैकड़ों थी अब हजारों मे है और टैंपू जिन्हें अंग्रेजी में ऑटो कहा जाता है उनकी संख्या सैकड़ों थी. लेकिन अब यह तादाद बढ़कर अधिक से भी अधिकतम हो चुकी है, जिनके कारण शहर भर में जाम का आलम यह है कि एक पैदल चलने वाले व्यक्ति के लिए भी कोई भी सड़क का एरिया किसी जहन्नम से कम नहीं है, अधिकारियों को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए ताकि लोगों को जाम से निजात दिलाई जा सके।।

Anuj Tiwari

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