सही सड़क पर डामरीकरण! सरकारी धन की बर्बादी या कोई और कहानी?
बदहाल सड़कें अनदेखी, सही सड़क पर डामर! आखिर क्यों?

अच्छी सड़क पर डामर! विकास या सरकारी धन की बर्बादी?
लखनऊ। जहां इंदिरा नगर और आस-पास के इलाकों में कई सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, वहीं पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे गेट से सेक्टर-12 होते हुए मुंशी पुलिया, ओल्ड पिकनिक स्पॉट रोड तक पहले से सही- सलामत सड़क पर डामरीकरण किया जा रहा है। यह काम लोक निर्माण विभाग (PWD) के द्वारा करवाया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु भट्ट, अध्यक्ष इंदिरा नगर सद्भावना एवं सर्व कल्याण समिति, ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि जब क्षेत्र में कई सड़कें बदहाल स्थिति में हैं, तो सही सड़क पर दोबारा डामरीकरण क्यों किया जा रहा है? उन्होंने इस काम को सरकारी धन की खुली बर्बादी बताया और कहा कि यह करोड़ों रुपये उन सड़कों पर खर्च किए जा सकते थे, जिनकी हालत वास्तव में खराब है।
क्या ‘बजट बचाने’ का यह नया तरीका है?
आश्चर्य की बात यह है कि जिन सड़कों की मरम्मत की सख्त जरूरत है, वे धूल फांक रही हैं और जिन पर आराम से चला जा सकता है, वहां डामर की नई परत बिछाई जा रही है। क्या यह सरकारी बजट को ‘समय पर खर्च करने’ का नया तरीका है, या फिर कुछ और खेल चल रहा है?
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हिमांशु भट्ट ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की जांच कराने की मांग की है और माननीय मुख्यमंत्री व लोक निर्माण मंत्री से इस मामले में संज्ञान लेने की अपील की है।
जनता की आवाज़ – ‘पहले असली जरूरत को देखो!’
स्थानीय लोगों ने भी इस कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि “हम उन सड़कों पर गिरते-पड़ते चलने को मजबूर हैं, जो सच में खराब हैं, लेकिन सरकार की प्राथमिकता किसी और दिशा में दिख रही है।”
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं या फिर यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा!




