जांच में आरोप सिद्ध नहीं, फिर भी कार्यवाही

शासन के आदेश और जांच रिपोर्ट में ही विरोधाभास
उन्नाव। सिकंदरपुर करन के पशुचिकित्साधिकारी डॉ. शरद शाक्य के विरुद्ध सरकारी वाहन के डीजल बिल में कथित वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच पूरी होने के बाद एक नया विवाद सामने आया है। जहां जांच अधिकारी की आख्या में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि नहीं होने और डॉ. शरद शाक्य को दोषी न पाए जाने की बात कही गई है, वहीं उत्तर प्रदेश शासन ने 22 जुलाई 2026 को जारी आदेश के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। मामला वर्ष 2025 में ₹4,220 के कथित डीजल बिल भुगतान से जुड़ा है। शिकायत के बाद शासन ने विभागीय जांच बैठाई और अपर निदेशक स्तर के अधिकारी को जांच सौंपी। जांच अधिकारी डॉ. विजयवीर चन्द्रयाल ने अभिलेखों, संबंधित पेट्रोल पंप से प्राप्त जानकारी तथा अन्य साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया कि डॉ. शरद शाक्य के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि नहीं हुई तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता है। एक ओर विभागीय जांच रिपोर्ट में आरोप सिद्ध नहीं होने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर उसी प्रकरण में निलंबन की कार्रवाई की गई। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन अंतिम निर्णय जांच आख्या के आधार पर लेता है या निलंबन आदेश के आधार पर विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ती है।

