गंदे पानी से त्रस्त लखनऊ की जनता, जलकल विभाग बेखबर – 15वें वित्त के पैसे का इंतजार या बहाना?
Lucknow's citizens distressed by dirty water, Jal Kal department unaware

लखनऊ की जनता अब जवाब चाहती है, बहाने नहीं।
लखनऊ। शहर में गंदे पानी की आपूर्ति और लीकेज की समस्या से जनता बेहाल है, लेकिन जलकल विभाग जोन- 5 की सुस्ती किसी गहरी नींद में डूबी नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि लोग बीमार हो रहे हैं, दफ्तर नहीं जा पा रहे, लेकिन विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
आकाश त्रिवेदी, जो पेशे से एक जिम्मेदार पत्रकार हैं, आज पेट खराब होने के कारण अपने कार्यालय नहीं जा सके। वजह वही पुरानी—बीमारियों को न्योता देता गंदा पानी। सोचिए, ये तो महज एक नाम है, ऐसे कितने ही लोग होंगे जो इस समस्या से परेशान हैं, लेकिन जलकल विभाग शायद अपने दफ्तर की ठंडी हवा में इन तकलीफों से बेखबर आराम फरमा रहा है।
लीकेज या लापरवाही—जवाब कौन देगा?
जोन- 8 के दीक्षा स्कूल, वृंदावन कॉलोनी के पास पिछले कई दिनों से पानी का लीकेज हो रहा है। स्थानीय निवासी अंशुल अवस्थी ने समय रहते शिकायत भी की, लेकिन जवाब में मिली है बस विभाग की खामोशी। सवाल ये उठता है कि क्या ये लीकेज महज सिस्टम की खामी है या फिर इसमें भी कोई “मुनाफे की धार” बह रही है?
हेमचंद्र मिश्रा की पुकार भी बेअसर
हिंद नगर LDA कॉलोनी निवासी हेमचंद्र मिश्रा भी अपने इलाके में गंदे पानी और लीकेज की समस्या से तंग आ चुके हैं। कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद नतीजा वही ढाक के तीन पात। जलकल विभाग शायद इंतजार कर रहा है कि समस्या इतनी बड़ी हो जाए कि लोग खुद ही पानी छोड़ दें!
15वें वित्त का पैसा—समाधान या बहाने की नई परत?
जलकल विभाग के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह की मानें तो समस्या की जड़ 15वें वित्त आयोग की राशि न मिलने में छिपी है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे जब तक यह धन नहीं मिलेगा, तब तक साफ पानी और लीकेज की समस्या पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
तो क्या लखनऊ के नागरिक अब पीएम मोदी को चिट्ठी लिखें कि कृपया जल्दी से पैसा जारी करवा दें ताकि जलकल विभाग को अपनी नींद से जगाया जा सके?
आखिर कब तक चलेगा ये पानी का मजाक?
सवाल बड़ा है—क्या जनता यूं ही गंदा पानी पीती रहेगी? क्या जलकल विभाग अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ता रहेगा? या फिर 15वें वित्त का पैसा आते ही कोई जादू होगा, और लखनऊ वालों को मिलेगा वो हक, जो उन्हें कब का मिल जाना चाहिए था—साफ पानी।




