Mansa Devi Ropeway Tender पर High Court की रोक
मनसा देवी रोपवे टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप, High Court की सख्ती के बाद टेंडर प्रक्रिया पर लगी रोक

देहरादून/हरिद्वार।
Mansa Devi Ropeway Tender को लेकर Uttarakhand politics एक बार फिर गरमा गई है। टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद मामला अब High Court intervention तक पहुंच गया है। Haridwar Nagar Nigam पर लगाए गए आरोपों से शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा – “यह खुला भ्रष्टाचार है”
Leader of Opposition Yashpal Arya ने इस पूरे मामले को “corruption in Uttarakhand” का ताजा उदाहरण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम Haridwar ने जानबूझकर टेंडर की पात्रता शर्तों में गुपचुप तरीके से बदलाव किए, जिससे बिना अनुभव वाली कंपनियों को भी Ropeway Operation Contract में शामिल होने का मौका मिल गया।
“पहले सिर्फ उन्हीं कंपनियों को पात्र माना गया था जिन्हें ropeway संचालन का अनुभव था, लेकिन मार्च में नियमों में बदलाव कर दिया गया,” – यशपाल आर्य।
High Court की फटकार, पारदर्शिता पर सवाल
जब मामला Uttarakhand High Court पहुंचा तो कोर्ट ने इसे “गंभीर लापरवाही” करार देते हुए Tender Process Stay Order जारी कर दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह की प्रक्रियाएं नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने के समान हैं। कोर्ट की इस फटकार के बाद अब Haridwar Tender Scam की जांच की मांग तेज हो गई है।
बिना बोर्ड की मंजूरी हुआ बदलाव
सूत्रों के अनुसार, Municipal Commissioner Haridwar ने Tender Eligibility Criteria में बदलाव Board Approval के बिना किया। इससे पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। अब कोर्ट के निर्देश के बाद केवल उन्हीं एजेंसियों को पात्र माना जा रहा है जिन्हें infrastructure sectors जैसे Highway, Metro, Tunnel, Telecom में अनुभव है।
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शासन और नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल
Corruption in public contracts के इस मामले में अब state administration accountability भी सवालों के घेरे में है। विपक्ष ने पूरे प्रकरण की independent investigation की मांग की है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
“यह टेंडर सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देने की कोशिश है,” – यशपाल आर्य।




