Mann Ki Baat Live: महाकुम्भ 2025 पर PM मोदी का एकता और नवाचार का संदेश
Mann Ki Baat Live: PM Modi’s Message on Mahakumbh 2025, Unity, and Innovation

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “Mann Ki Baat” की 116वीं कड़ी: एकता, संस्कृति और नवाचार का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल के आखिरी रविवार को “मन की बात” कार्यक्रम की 116वीं कड़ी के माध्यम से देशवासियों को संबोधित किया। इस विशेष एपिसोड में प्रधानमंत्री ने महाकुम्भ 2025 से जुड़े संदेश और सांस्कृतिक महत्त्व पर विशेष जोर दिया।
महाकुम्भ 2025: एकता का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुम्भ 2025 को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि “एक हो पूरा देश” का संदेश देने वाला एक पवित्र अवसर बताया। उन्होंने कहा कि कुम्भ हमें यह सिखाता है कि “गंगा की अविरल धारा की तरह समाज भी अविभाजित रहना चाहिए।”
महाकुम्भ में जातिगत भेदभाव पर चोट
प्रधानमंत्री ने महाकुम्भ के मंच से जातिगत भेदभाव पर प्रहार करते हुए कहा कि “कुम्भ में कोई बड़ा नहीं होता, कोई छोटा नहीं होता। यह आयोजन सभी के लिए समान अवसर और समरसता का संदेश देता है। इस बार महाकुम्भ में पिछड़ी जातियों से महामंडलेश्वर बनाए जाने का ऐतिहासिक कदम उठाया जाएगा, जो सामाजिक सुधार और समानता की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
सनातन बोर्ड की स्थापना का प्रस्ताव
महाकुम्भ 2025 के दौरान सनातन बोर्ड (Sanatan Board) की स्थापना का प्रस्ताव भी चर्चा का केंद्र रहेगा। इस बोर्ड का उद्देश्य सनातन धर्म की महान परंपराओं और मूल्यों को संरक्षित करना और उन्हें आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिक बनाना है।
AI चैटबोर्ड का उपयोग: नवाचार का स्वागत
महाकुम्भ 2025 में पहली बार AI चैटबोर्ड का प्रयोग किया जाएगा। यह तकनीक श्रद्धालुओं को कुंभ मेले के आयोजन, मार्गदर्शन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित जानकारी प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने इसे “आधुनिकता और परंपरा का संगम” बताते हुए इस कदम की सराहना की।
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कुम्भ: अनेकता में एकता की झलक
प्रधानमंत्री मोदी ने कुम्भ को भारत की “अनेकता में एकता” का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ में विभिन्न राज्यों, भाषाओं और परंपराओं से आए लोग यह दिखाते हैं कि भारतीय संस्कृति कितनी विविध और समृद्ध है।
गंगा की महत्ता पर विशेष बल
प्रधानमंत्री ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का आधार है। महाकुम्भ 2025 में गंगा की स्वच्छता और अविरलता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि गंगा की धारा की तरह ही हमारा समाज भी बंटा हुआ नहीं, बल्कि एकजुट होना चाहिए।
महाकुम्भ 2025: आध्यात्मिकता और सामाजिक सुधार का संगम
प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुम्भ को भारतीय संस्कृति और सामाजिक सुधार का महत्वपूर्ण अवसर बताया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल आध्यात्मिकता का प्रसार नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और नवाचार को भी बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान
प्रधानमंत्री ने “Mann Ki Baat” के माध्यम से देशवासियों से आह्वान किया कि वे महाकुम्भ 2025 में भाग लें और इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाएं। उन्होंने इसे भारत की एकता और सनातन संस्कृति का उत्सव बताया।
महाकुम्भ 2025 में शामिल होकर इस अद्वितीय आयोजन का हिस्सा बनें और भारतीय संस्कृति की इस महान धरोहर को महसूस करें।



