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महापौर से सीधी बात: जनता की उम्मीद टूटी या मिला समाधान? | लखनऊ की गरीब जनता की पीड़ा

महापौर से रविवार को करें सीधी बात: उम्मीदों की शुरुआत या सिर्फ एक PR इवेंट?

लखनऊ, 8 जून 2025
हिंदुस्तान समाचार पत्र में छपे एक खास कॉलम “महापौर से रविवार को करें सीधी बात” ने लखनऊ की तमाम परेशान और हाशिए पर खड़ी जनता के दिलों में उम्मीद की एक नई किरण जगा दी। संदेश स्पष्ट था— लोग सीधे महापौर सुषमा खर्कवाल से बात कर सकते हैं, अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और समाधान पा सकते हैं। यह पहल ‘फोन-इन’ कार्यक्रम के तहत हो रही थी और भरोसा दिलाया गया था कि महापौर स्वयं व्यक्तिगत रुचि लेकर समस्याओं को हल करेंगी।

जनता को लगा कि अब शासन-प्रशासन उनकी सुनेगा, लेकिन क्या वाकई ऐसा हुआ?

पंडितखेड़ा की जनता की दर्दभरी दास्तान

लखनऊ के सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र का एक हिस्सा— पंडितखेड़ा, वर्षों से विकास की बाट जोह रहा है। इस क्षेत्र में अचानक कुछ महीनों पूर्व कई विकास कार्य एक साथ बेतरतीब ढंग से शुरू किए गए, जिनमें शामिल थे:

  • केसरीखेड़ा रेलवे ओवरब्रिज निर्माण
  • रामदास खेड़ा रेलवे अंडर पास कार्य
  • जलनिकासी के लिए नाला निर्माण

इन कार्यों के चलते क्षेत्र की रोजमर्रा की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो गई। कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं दिया गया, ऑफिस, स्कूल और अस्पताल के लिए आने-जाने का रास्ता बंद हो गया।

अब हालत यह है कि केसरीखेड़ा ओवरब्रिज के नीचे से जाना ही एकमात्र रास्ता बचा है, जो जगह-जगह से टूटा हुआ है और बारिश के मौसम में जानलेवा साबित हो सकता है।

नाला निर्माण अधूरा, जलभराव की चेतावनी

नाला निर्माण अधूरा पड़ा है और बारिश शुरू होते ही वाटर लॉगिंग की समस्या विकराल रूप लेने को तैयार है। लोगों के घरों में पानी भरने की नौबत आ सकती है, और फिर बीमारी व दुर्घटनाओं का डर सिर पर मंडरा रहा है।

जनता ने किया संपर्क, क्या मिला जवाब?

पंडितखेड़ा की जनता ने जैसे ही ‘फोन-इन’ कार्यक्रम में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर अपनी समस्या साझा करनी चाही, तो प्रतिक्रिया चौंकाने वाली रही।

प्रदीप राजपाल (स्थानीय निवासी) की महापौर से जो बातचीत हुई उसका अनुभव उन्होंने पंडितखेड़ा समग्र विकाश समिति के व्हाट्सप्प ग्रुप चैट में शेयर किया। उन्होंने लिखा:

“मैंने अपनी बात अभी पूरी भी नहीं रखी थी कि महापौर की तरफ से लाइन कट कर दी गई।”

सवालों के घेरे में Phone-in कार्यक्रम

इस घटनाक्रम के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है —
क्या “महापौर से सीधी बात” सिर्फ एक PR इवेंट था?
क्या इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान था या जनसंपर्क बनाए रखना?

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पंडितखेड़ा की जनता पूछ रही है —

  • अगर महापौर भी उनकी बात नहीं सुनेंगी तो वह किसके पास जाएं?
  • क्या उनके दुख-दर्द का कोई सच्चा प्रतिनिधि है?

“महापौर से सीधी बात” एक बेहतरीन पहल हो सकती थी, लेकिन अगर लोगों की समस्याओं को गंभीरता से ना सुना जाए, तो यह सिर्फ कागज़ी प्रचार बनकर रह जाएगा।
लखनऊ की प्रशासनिक व्यवस्था को चाहिए कि वह असली ज़मीनी हकीकत से रूबरू हो, ना कि केवल प्रचार के भरोसे जनता का विश्वास मांगे।

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