लखनऊ में डेंगू-चिकनगुनिया का खतरा: क्या नगर निगम तैयार है या फिर मचेगा हाहाकार?

डेंगू-चिकनगुनिया आने का हो गया समय, क्या लखनऊ है तैयार? या अस्पतालों में लगेंगी लंबी लाइनें और मचेगा हाहाकार? जमीनी हकीकत खतरनाक!
लखनऊ। बारिश का मौसम आते ही डेंगू और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा एक बार फिर सिर उठाने लगा है। सवाल ये है कि क्या लखनऊ नगर निगम और शासन-प्रशासन इस खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं या फिर इस बार भी शहरवासियों को अस्पतालों की लंबी लाइनों में खड़े रहकर इलाज करवाना पड़ेगा।
स्कूल के बाहर जमा पानी, न स्कूल प्रशासन जागा न नगर निगम
लखनऊ के एक प्रतिष्ठित स्कूल के गेट के सामने जगह-जगह गंदा पानी जमा है। इस पानी में मच्छरों का लार्वा पनप रहा है, लेकिन स्कूल प्रशासन इस समस्या से पूरी तरह बेखबर नजर आ रहा है। वहीं, नगर निगम भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े बैठा है। हालात ये हैं कि बच्चों को रोजाना इसी जमा पानी के पास से होकर स्कूल आना-जाना पड़ता है।
देश का भविष्य खतरे में, लेकिन तैयारी शून्य
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि आने वाले समय में यही बच्चे डेंगू और चिकनगुनिया का शिकार हो सकते हैं। शहर में न तो कोई Awareness Campaign चलाया जा रहा है और न ही Fogging या Antilarva छिड़काव जैसी बुनियादी तैयारी की गई है।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में तीसरा स्थान पाने का खुमार अभी तक नगर निगम के सिर से उतरा नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद खतरनाक है। गंदगी और जमा पानी से मच्छरों का आतंक बढ़ रहा है और संक्रमण फैलने का खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।
जिम्मेदार कौन?
नगर निगम के अधिकारियों से लेकर स्कूल प्रबंधन तक, सभी की लापरवाही के चलते शहर की आबादी डेंगू-चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के मुहाने पर खड़ी है। हर साल लाखों रुपये Fogging और साफ-सफाई के नाम पर खर्च होते हैं, लेकिन नतीजा शून्य ही रहता है।
अस्पतालों में हाहाकार के आसार
अगर अभी भी नगर निगम और स्कूल प्रशासन नहीं जागे तो अगले कुछ हफ्तों में हालात बेकाबू हो सकते हैं। डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या बढ़ने पर सरकारी अस्पतालों में बिस्तर कम पड़ जाएंगे और इलाज के लिए लंबी लाइनें लग जाएंगी।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए जागरूकता सबसे जरूरी है। अगर समय रहते Fogging, साफ-सफाई और Anti-Larva दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
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क्या करना चाहिए?
- आसपास पानी जमा न होने दें।
- घर के पास सफाई रखें।
- बच्चों को फुल स्लीव्स कपड़े पहनाएं।
- मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- प्रशासन को जागरूक करें और लापरवाही पर सवाल उठाएं।
डेंगू-चिकनगुनिया से बचने के लिए सिर्फ प्रशासन नहीं, बल्कि आम जनता को भी सतर्क रहना होगा। वरना इस बार भी अस्पतालों में हाहाकार मचना तय है।
कहीं देर न हो जाए, जागिए – सतर्क रहिए – सुरक्षित रहिए!
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