किसानों के पाइप की सप्लाई में ‘खेल’! कैंटर में भरकर अन्य जिलों व अन्य प्रदेश में भेजा जा रहा माल?

उद्यान विभाग की योजना पर उठे सवाल, विरामपुर के प्रतिष्ठान से सामान लादे जाने का वीडियो वायरल;
एटा। किसानों को योजना के तहत मिलने वाले पाइप और अन्य सामान की सप्लाई को लेकर एटा में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शहर के विरामपुर स्थित मैसर्स रानू इंटरप्राइजेज से कैंटर में सामान लादकर भेजे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद आरोप लग रहे हैं कि किसानों के लिए स्वीकृत सामग्री को दूसरे प्रदेशों व जिलों में भेजा जा रहा है।
वायरल वीडियो में UP86T9906 नंबर के कैंटर में सामान लादा जाता दिखाई दे रहा है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह सामान किस योजना का है और इसे अन्य स्थानों पर भेजने का आदेश किसने दिया?
किसानों के लिए आया माल आखिर जा कहां रहा?
आरोप है कि उद्यान विभाग की योजना के तहत किसानों के लिए निर्धारित पाइप और अन्य सामग्री टेंडर से जुड़े प्रतिष्ठानों से दूसरे जनपदों अथवा राज्यों में भेजी जा रही है। यदि आरोप सही हैं तो यह विभागीय सप्लाई व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामला सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि किसानों के नाम पर स्वीकृत सामग्री का स्टॉक कहां दर्ज है? कितनी मात्रा में सामान आया था? किस किसान अथवा लाभार्थी को इसकी आपूर्ति होनी थी और किस आदेश के आधार पर माल दूसरे स्थान के लिए रवाना किया गया?
विभागीय अधिकारियों की जानकारी में था पूरा मामला?
कैंटर में सामान लादकर भेजे जाने के बाद अब यह भी सवाल उठ रहा है कि यह सप्लाई विभागीय अधिकारियों की जानकारी में हुई या फिर बिना अनुमति के ही माल बाहर भेज दिया गया। यदि विभाग को इसकी जानकारी थी तो संबंधित अभिलेखों में इसकी क्या वजह दर्ज है और यदि जानकारी नहीं थी तो विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
जांच हुई तो खुल सकती है टेंडर से सप्लाई तक की पूरी कहानी
मामले की जांच में टेंडर प्रक्रिया, सप्लायर का चयन, स्टॉक रजिस्टर, बिल-वाउचर, चालान, किसानों को जारी सामग्री और वाहन की रवाना संबंधी जानकारी सामने आ सकती है। इन दस्तावेजों के मिलान से ही स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा सामान वास्तव में किसानों के लिए स्वीकृत सामग्री है या नहीं और उसे दूसरे जिले/राज्य भेजने की अनुमति थी अथवा नहीं।
फिलहाल वायरल वीडियो और उसमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उद्यान विभाग के अधिकारियों का पक्ष और दस्तावेजी जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।




