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हिमालय से बुन्देलखण्ड तक कृषिवानिकी एवं जल संरक्षण अति आवश्यक :- जिलाधिकारी झांसी

झांसी//लोकेश मिश्रा 8718036597

झांसी///////  केन्द्रीय कृषिवानिकी अनुसंधान संस्थान, झाँसी में आज राष्ट्रीय दिवस की पूर्वसंध्या में बुन्देली स्ट्राबेरी पर आधारित डाकूमेन्ट्री फिल्म का विमोचन जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के मुख्य आतिथ्य में किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि जल संरक्षण एवं कृषिवानिकी बुन्देलखण्ड की अति आवश्यकता है। उन्होंने बुन्देलखण्ड में शुष्क जलवायु वाली कृषि फसले एवं वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।   
    उन्होंने कहा कि जब किसान अपनी आँखों से देखता है तब उसे विश्वास होता है तथा कृषिवानिकी संस्थान को झांसी जनपद के सभी विकास खण्डों में कम से कम दो गाँव में अपनी तकनीकी को प्रदान करके ज्यादा से ज्यादा किसानों से जुड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी भी स्कूल आंगनवाड़ी केंद्र गौशाला आदि गोद लेते हैं उसी तर्ज पर वैज्ञानिक भी झांसी के प्रत्येक विकास खंड के एक-एक गांव गोद ले सकते हैं उन्होंने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि ऐसा होता है तो बुंदेलखंड का किसान आत्मनिर्भर तो होगा ही साथ ही उसका प्रदेश की जीडीपी में भी योगदान बढ़ जाएगा।
  ज्ञात हो कि श्री रविन्द्र कुमार देश के पहले एवं केवल आई.ए.एस. अधिकारी है जो माउन्ट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़कर विजय हासिल किये है। सन् 2013 एवं सन् 2019 में उन्होंने माउन्ट एवरेस्ट की चोटी पर नेपाल तथा चीन के रास्ते विजय हासिल की थी। उन्होंने अपने अभियान को स्वच्छ गंगा स्वच्छ भारत एवरेस्ट अभियान 2019 दिया था। यह अपने साथ गंगा लेकर एवरेस्ट की चोटी पर अर्पित किये थे। उन्होंने कृषिवानिकी एवं जल संरक्षण को जन-आंदोलन के रूप में मीशन मोड के द्वारा प्रचार-प्रसार एवं कार्यान्वयन पर जोर दिया।
     कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री शैलेष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि संस्थान द्वारा स्ट्राबेरी में किया गया कार्य बहुत ही सराहनीय है तथा यह चुनौतियों से भरा हुआ काम है जो कि कृषिवानिकी संस्थान ने कर दिखाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभाग जैसे कृषि, उद्यान, वन, मत्स्य तथा पशुपालन आदि के साथ संस्थान के साथ समन्दवन आवश्यक है ताकि किसानों की दशा एवं दिशा बदली जा सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संस्थान को कृषक समुदाय से जुड़ने की आवश्यकता है तथा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कृषकों से के जीविकोपार्जन में सहयोग देने की आवश्यकता है।
     श्री एस के द्वारा मुख्य प्रदशनाबार्ड ने कहा कि बुन्देलखण्ड में स्ट्राबेरी की खेती का सफल प्रयोग एक नवाचार है तथा इसे ज्यादा से ज्यादा किसान भाइयों तक पहुँचाने की आश्वयकता है।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डा. ए अरुणाचलम, निदेशक ने संस्थान की उपलब्धियों एवं स्ट्रावेरी की डाकूमेन्ट्री फिल्म के बारे में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, माननीय मुख्य मंत्री श्री योगी, जिलाधिकारी, झाँसी, मुख्य विकास अधिकारी, झांसी, नाबार्ड आदि की भूमिका का उल्लेख किया। अभी हाल ही में कृषिवानिकी संस्थान ने 05 मई का अपना 35वीं स्थापना दिवस मनाया है। स्ट्रॉबेरी के कार्यान्वयन में उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागो-कृषि उद्यान नाबार्ड तथा जिला प्रशासन के साथ मिलकर कदम से कदम मिलाकर कृषिवानिकी संस्थान ने झांसी जिले के बबीना एवं मोंठ ब्लाक में कन्वर्जन्स साकार कर समन्ववन को प्रस्तुत किया है। कृषिवानिकी संस्थान ने पूरे देश में 63 गाँवों के 18000 कृषकों के साथ सीधे सम्पर्क में कार्य कर रहा है जिसमें कि 29 गाँव बुन्देलखण्ड के जनपदों में गोंद लिये गये हैं। बुन्देलखण्ड में जलागम प्रबन्धन के किये गये कार्यों में कृषिवानिकी संस्थान की विकसित तकनीकियों को प्रयोग किये गये हैं।
       कार्यक्रम की शुरूआत आई.सी.एआर कुलगीत से हुई इस कार्यक्रम को हाईब्रिड मोड में किया गया जिसमें मुख्य महाप्रबन्धक नाबाई, रेमन्ड डिसूजा, महा प्रबन्धक नाबाई, भूपेश पाल, डी.डी.एम. नाबार्ड प्रोफेसर एम डोबरियाल, कृषि विश्वविद्यालय, झांसी, डा. अशोक यादव, वैज्ञानिक फल विज्ञान तथा संस्थान के वैज्ञानिक अधिकारी कर्मचारी शोध अध्येता शोध सहायक नाबार्ड एवं प्रगतिशील कृषक आत्माराम राजपूत  शान्तीलाल निषाद,  ओम जी गुर्जर एवं  राम प्रताप सिंह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डा. आरपी द्विवेदी तथा धन्यवाद ज्ञापन डा. इन्दर देव ने किया।

Lokesh Mishra

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