जोन-7 में सफाई व्यवस्था बेपटरी! तकरोही गांव में कूड़े से पटे खाली प्लॉट, सालभर से नालियां साफ नहीं; आखिर कहां हैं जिम्मेदार?

डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के दावों पर उठे सवाल, घरों के आसपास जमा गंदगी और सीवर की बदबू से लोगों का जीना दुश्वार; सफाई निरीक्षक संचिता मिश्रा और बृजेश प्रजापति की निगरानी पर सवाल
दो सफाई निरीक्षकों के भरोसे जोन-7 की व्यवस्था, शहीद भगत सिंह द्वितीय वार्ड में पार्षद की सक्रियता भी सवालों के घेरे में; स्थानीय लोगों का आरोप—शिकायत करो तो कभी कर्मचारी आते हैं, वरना कोई झांकने तक नहीं आता
लखनऊ। राजधानी को स्वच्छ बनाने के नगर निगम के दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो तो जोन-7 के शहीद भगत सिंह द्वितीय वार्ड स्थित तकरोही गांव पहुंच जाइए। यहां डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खाली प्लॉट कूड़े से पटे हैं, नालियों का गंदा पानी प्लॉटों में जमा हो रहा है और जगह-जगह सीवर की समस्या लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गंदगी और दुर्गंध के कारण घरों में रहना तक मुश्किल हो रहा है।



मायावती मोड़ के पास सूचना इंडिया की टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की। लोगों ने बताया कि क्षेत्र में सफाई व्यवस्था नियमित नहीं है। कभी आधी सफाई करके कर्मचारी चले जाते हैं तो कभी कई दिनों तक सफाईकर्मी दिखाई ही नहीं देते। तकरोही गांव के कुछ हिस्सों में सफाई कर्मचारी पहुंचते तक नहीं हैं।
🔴 सालभर से नालियों की सफाई नहीं, शिकायत के बाद ही जागता है विभाग!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई नालियों की करीब एक साल से सफाई नहीं हुई है। नालियों में गंदगी और सिल्ट जमा होने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है। गंदा पानी खाली प्लॉटों में पहुंच रहा है। सीवर की समस्या भी बनी हुई है। लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर कभी-कभार कर्मचारी पहुंच जाते हैं, लेकिन नियमित सफाई की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। जमा गंदगी से मच्छरों का प्रकोप और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका है। कुछ निवासियों ने बीमारियां होने की शिकायत भी की।
🔴 संचिता मिश्रा और बृजेश प्रजापति की निगरानी पर सवाल
नगर निगम जोन-7 की सफाई व्यवस्था में सफाई निरीक्षक संचिता मिश्रा और बृजेश प्रजापति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बीच बड़ा सवाल यह है कि आखिर सफाई कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और कार्यों की निगरानी किस तरह हो रही है? यदि क्षेत्र में सफाई व्यवस्था दुरुस्त है तो खाली प्लॉटों में कूड़े के ढेर और नालियों में जमा गंदगी की समस्या क्यों बनी हुई है? क्या जिम्मेदार अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं या पूरी व्यवस्था केवल शिकायत मिलने पर ही सक्रिय होती है?


🔴 पार्षद की निगरानी कहां? वार्ड की बदहाली पर जवाब कौन देगा?
शहीद भगत सिंह द्वितीय वार्ड की सफाई व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय पार्षद की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वार्ड की समस्याओं को नगर निगम तक पहुंचाना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना जनप्रतिनिधि की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल है कि जब स्थानीय लोग लंबे समय से गंदगी और नालियों की समस्या से परेशान हैं तो पार्षद की ओर से सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए? क्या पार्षद ने जिम्मेदार अधिकारियों के साथ क्षेत्र का निरीक्षण किया? यदि किया तो उसका परिणाम जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा?


🔴 नगर आयुक्त संज्ञान लें, सफाई व्यवस्था की हो जमीनी जांच
स्थानीय लोगों की शिकायतों ने जोन-7 की सफाई व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरत है कि नगर आयुक्त गौरव कुमार इस मामले का संज्ञान लेकर तकरोही गांव में सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, नालियों की सफाई और सीवर की स्थिति की जांच कराएं। साथ ही यह भी स्पष्ट हो कि क्षेत्र में नियमित सफाई की जिम्मेदारी किसकी है और शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है।


अब देखना यह है कि नगर निगम जोन-7 के जिम्मेदार अधिकारी तकरोही गांव की बदहाल सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या स्थानीय लोगों को आगे भी शिकायतों के सहारे ही रहना पड़ेगा।


